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भारतीय AI फिल्म 'कलियुग राइजिंग' का धमाका: 9000 फिल्मों को पछाड़कर रचा इतिहास, मात्र 86 घंटे में हुई तैयार

नई दिल्ली. भारतीय रचनात्मकता और आधुनिक तकनीक के मेल ने वैश्विक फिल्म जगत में हलचल मचा दी है। निर्देशक प्रतया साहा की एआई (AI) निर्मित फिल्म 'कलियुग राइजिंग' ने 'हिक्सफील्ड मेक योर एक्शन' प्रतियोगिता में दुनिया भर की 9,000 फिल्मों के बीच 10वां स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया है। यह सफलता भारतीय फिल्म उद्योग में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।

तकनीक का करिश्मा: 86 घंटे में फिल्म निर्माण

आमतौर पर किसी बड़ी फिल्म को बनाने में महीनों और सालों का समय लगता है, लेकिन 'कलियुग राइजिंग' को मात्र 86 घंटे के भीतर तैयार किया गया है। फिल्म की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • कहानी: फिल्म एक साउथ एशियाई बॉक्सिंग रिंग की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहाँ नायक अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए संघर्ष करता है।

  • निर्माण: फिल्म के पात्र (Characters) और दृश्य पूरी तरह से एआई टूल्स की मदद से बनाए गए हैं।

  • लागत और समय: निर्देशक प्रतया साहा के अनुसार, एआई के उपयोग से प्रोडक्शन और पोस्ट-प्रोडक्शन की लागत और समय में भारी कमी आई है।

एआई से डरने का नहीं, साथ चलने का वक्त

निर्देशक प्रतया साहा का कहना है कि एआई फिल्म जगत के लिए खतरा नहीं, बल्कि एक असाधारण टूल है। 'इमैजिन इफ स्टूडियो' के संस्थापक कृष्णा और एआई कलाकार अंकुश देवा के सहयोग से बनी इस फिल्म ने साबित कर दिया है कि सही टूल्स के इस्तेमाल से कुछ ही दिनों में विश्व स्तरीय सिनेमा बनाया जा सकता है। इस सफलता के बाद फिल्म के पार्ट-2 की तैयारी भी तेज हो गई है।

भारत में एआई फिल्मों की बाढ़

'कलियुग राइजिंग' की सफलता के साथ ही भारत में कई अन्य एआई आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है:

  • नायशा: बॉलीवुड सुपरस्टार और रैपर की कहानी।

  • चिरंजीवी हनुमान: पौराणिक कथा की एआई प्रस्तुति।

  • शिवसती और उल्लूमैन: सुपरहीरो और माइक्रोड्रामा पर आधारित फिल्में।

  • शतक (पार्ट 2): आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर आधारित फिल्म।

एआई सिनेमा के फायदे:

  1. बजट में भारी कटौती: बड़े विजुअल इफेक्ट्स अब कम खर्च में संभव हैं।

  2. तेज प्रोडक्शन: महीनों का काम घंटों में सिमट जाएगा।

  3. यथार्थवादी अनुभव: तकनीक के माध्यम से दर्शकों को वास्तविक अनुभव के करीब ले जाया जा सकेगा।

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