तेहरान, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री अराघची का मानना है कि पश्चिम एशिया के हालात पहले जैसे नहीं रहेंगे। उनके मुताबिक इसका जिम्मेदार इजरायल है। उन्होंने रविवार को तेहरान में आयोजित एक विशेष बैठक में ये भी कहा कि 'युद्ध फिर से शुरू हो या न हो, ईरान की नीतियां नहीं बदलेंगी।'
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तेहरान, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री अराघची का मानना है कि पश्चिम एशिया के हालात पहले जैसे नहीं रहेंगे। उनके मुताबिक इसका जिम्मेदार इजरायल है। उन्होंने रविवार को तेहरान में आयोजित एक विशेष बैठक में ये भी कहा कि 'युद्ध फिर से शुरू हो या न हो, ईरान की नीतियां नहीं बदलेंगी।'
तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार बैठक विदेश नीति पर आम सहमति बनाने में दिवंगत राजनयिक कमाल खराज्जी की भूमिका पर केंद्रित थी। अब्बास अराघची ने शांति और स्थिरता पर आधारित एक ऐसी क्षेत्रीय व्यवस्था के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई, जिसे विदेशी हस्तक्षेप के बिना क्षेत्रीय देश खुद सुनिश्चित करें।
विदेश मंत्री ने पिछले डेढ़ साल के संघर्ष, विशेष रूप से अमेरिका-इजरायल के आक्रामक युद्धों को एक 'टर्निंग पॉइंट' (महत्वपूर्ण मोड़) बताया और कहा कि इस संघर्ष के बाद "अब कुछ भी पहले जैसा नहीं रहेगा।"
अराघची ने कहा, "इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों ने न तो अपने मेजबान देशों को और न ही किसी अन्य देश को शांति या सुरक्षा दी है। इसके विपरीत ये ठिकाने खुद असुरक्षा का स्रोत बन गए हैं। ईरान मूल रूप से ऐसी किसी भी पहल का स्वागत करता है, जिससे क्षेत्रीय देश अपनी क्षमताओं पर अधिक भरोसा कर सकें।"
विदेश मंत्री ने दावा, "इजरायल का पर्दाफाश हो चुका है; सब जान गए हैं कि इस क्षेत्र में युद्ध भड़काने वाली एकमात्र ताकत वही है। वह बार-बार क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता कायम होने से रोकता है, जबकि खुद युद्ध भड़काने और पड़ोसी देशों को कमजोर करने की कोशिश करता है।"
उन्होंने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए विदेशी ताकतों की पूरी तरह से वापसी को एक अनिवार्य शर्त बताया। उन्होंने कहा, "ये ताकतें इस क्षेत्र में इजरायल की रक्षा करने के लिए आई हैं।" अराघची ने चेतावनी दी कि उनकी मौजूदगी से पूरे क्षेत्र में केवल असुरक्षा ही बढ़ेगी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने तर्क दिया, "ऐसा नहीं हो सकता कि क्षेत्र के एक हिस्से में शांति हो, जबकि दूसरे हिस्सों में युद्ध और टकराव जारी रहे।"
अराघची ने बताया कि पाकिस्तान, कतर और अन्य पक्षों की मध्यस्थता में अमेरिका के साथ हुई बातचीत के दौरान, ईरान ने इस बात पर जोर दिया कि सभी मोर्चों पर शत्रुता खत्म होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो क्षेत्रीय स्थिरता हासिल करना संभव नहीं होगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में विदेश मंत्री ने कहा, "यह रणनीतिक जलमार्ग दशकों से खुला रहा है। इसके तटीय देश ईरान और ओमान में से किसी ने भी समुद्री यातायात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। इसके बजाय, इन दोनों देशों ने सुरक्षा सुनिश्चित करने और समुद्री पर्यावरण की रक्षा करने के लिए काम किया है। हां लेकिन यहां भी अब सब कुछ पहले जैसा नहीं रहेगा।"
युद्ध की नई चर्चाओं पर उन्होंने कहा, "युद्ध हो या न हो, हमारी नीतियां वैसी ही बनी रहेंगी।" अराघची ने फिर दोहराया कि ईरान और इस क्षेत्र के अन्य देशों को बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के शांति से एक साथ रहना चाहिए। यही क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता की ओर जाने वाला एकमात्र रास्ता है।
बैठक में खराज्जी को भी श्रद्धांजलि दी गई। खराज्जी 1997 से 2005 तक ईरान के विदेश मंत्री रहे, और 1989 से 1997 तक संयुक्त राष्ट्र में देश के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया। वे एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भी थे। वे बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के समर्थक थे; उन्होंने पेरिस में आयोजित होने वाले वार्षिक 'लीडर्स फॉर पीस' सम्मेलन में भी हिस्सा लिया था।
1 अप्रैल 2026 को, अमेरिका-इजरायल ने तेहरान में खराज्जी के आवास पर संयुक्त हवाई हमले किया था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी पत्नी की मौत हो गई। 9 अप्रैल को उनकी भी मौत हो गई थी।
--आईएएनएस
केआर/
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