Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

जल जीवन मिशन घोटाला: पूर्व मंत्री महेश जोशी को अदालत से झटका, गिरफ्तारी को वैध ठहराया


जयपुर, 9 जून (आईएएनएस)। राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में बड़ा झटका लगा है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों की विशेष अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए रिहाई की मांग की थी।

जयपुर, 9 जून (आईएएनएस)। राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में बड़ा झटका लगा है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों की विशेष अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए रिहाई की मांग की थी।

विशेष न्यायाधीश राजेश कुमार दादिया ने अपने आदेश में कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गिरफ्तारी के दौरान संवैधानिक प्रावधानों और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के नियमों का पर्याप्त रूप से पालन किया है। अदालत ने माना कि जोशी के परिवार के सदस्यों को गिरफ्तारी की सूचना समय पर मौखिक और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से दी गई थी, इसलिए गिरफ्तारी को अवैध नहीं माना जा सकता।

महेश जोशी की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि 7 मई को गिरफ्तारी और उसके बाद पांच दिन की पुलिस रिमांड लेने के दौरान अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। बचाव पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय के ‘विहान कुमार बनाम हरियाणा राज्य’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के कारणों की लिखित सूचना न तो परिवार के सदस्यों को दी गई और न ही इसका कोई लिखित प्रमाण उपलब्ध कराया गया। इसी आधार पर गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए तत्काल रिहाई की मांग की गई।

वहीं, विशेष लोक अभियोजक मंजुला जैन ने अदालत को बताया कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में एसीबी की टीम गिरफ्तारी वारंट लेकर जोशी के आवास पहुंची थी। उस समय उनके पुत्र रोहित जोशी, पुत्रवधू और बड़ी बहन घर पर मौजूद थे। अधिकारियों ने अपनी पहचान बताने के बाद कार्रवाई की जानकारी दी थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, जोशी को सुबह की दिनचर्या पूरी करने का समय दिया गया, जिसके बाद उन्हें एसीबी मुख्यालय ले जाकर औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी की सूचना सबसे पहले फोन पर और बाद में व्हाट्सएप के माध्यम से उनके पुत्र रोहित जोशी को भेजी गई। अदालत में इन संचार माध्यमों के स्क्रीनशॉट भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बीएनएसएस की धारा 48 का मुख्य उद्देश्य आरोपी के कानूनी बचाव के अधिकार की रक्षा करना है। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि रिमांड पर सुनवाई के दौरान महेश जोशी के अधिवक्ता मौजूद थे और उन्होंने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा था। इससे स्पष्ट है कि परिवार और कानूनी प्रतिनिधियों को समय पर सूचना दे दी गई थी।

--आईएएनएस

एसएके/डीकेपी

Share:

Leave A Reviews

Related News