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जमशेदपुर में 'जगत की अधिष्ठात्री' का भव्य मंदिर: 64 फीट ऊंचा राजगोपुरम, दर्शन मात्र से दूर होते हैं कष्ट


जमशेदपुर, 19 मई (आईएएनएस)। देवाधिदेव महादेव की अर्धांगिनी माता पार्वती व उनके कई रूपों के देश-दुनिया में कई भव्य व भक्ति से भरपूर मंदिर हैं। ऐसे में स्टील सिटी के नाम से प्रसिद्ध जमशेदपुर जो न सिर्फ औद्योगिक नगरी है, बल्कि आध्यात्मिक स्थलों की दृष्टि से भी समृद्ध है। इस शहर के खरंगाझार बाजार से मात्र 500 मीटर की दूरी पर पहाड़ी पर जगत की अधिष्ठात्री का मंदिर स्थित है, जहां मान्यता है कि दर्शन मात्र से भक्तों के दूर हो जाते हैं और पाप कट जाते हैं।

जमशेदपुर, 19 मई (आईएएनएस)। देवाधिदेव महादेव की अर्धांगिनी माता पार्वती व उनके कई रूपों के देश-दुनिया में कई भव्य व भक्ति से भरपूर मंदिर हैं। ऐसे में स्टील सिटी के नाम से प्रसिद्ध जमशेदपुर जो न सिर्फ औद्योगिक नगरी है, बल्कि आध्यात्मिक स्थलों की दृष्टि से भी समृद्ध है। इस शहर के खरंगाझार बाजार से मात्र 500 मीटर की दूरी पर पहाड़ी पर जगत की अधिष्ठात्री का मंदिर स्थित है, जहां मान्यता है कि दर्शन मात्र से भक्तों के दूर हो जाते हैं और पाप कट जाते हैं।

माता पार्वती के एक अवतार को समर्पित भुवनेश्वरी मंदिर (टेल्को भुवनेश्वरी मंदिर) भक्तों की आस्था के प्रमुख केन्द्रों में से एक है। जगत की अधिष्ठात्री देवी मां भुवनेश्वरी को समर्पित यह मंदिर चमत्कारों से परिपूर्ण है, और मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से बड़े से बड़े कष्टों से मुक्ति मिल जाती है और माता रक्षा करती हैं।

यह मंदिर 1978 में स्वामी रंगराजन द्वारा स्थापित किया गया था। द्रविड़ वास्तुकला की शानदार शैली में बना यह मंदिर देखने वालों को अपनी भव्यता से मंत्रमुग्ध कर देता है। मंदिर का मुख्य आकर्षण इसका पांच मंजिला राजगोपुरम यानी प्रवेश द्वार है, जो 64 फीट की ऊंचाई पर खड़ा है और पांच सुंदर कलशों से सजाया गया है। मंदिर का गर्भगृह 32 फीट ऊंचा है, जिसमें माता भुवनेश्वरी की विशाल प्रतिमा स्थापित है।

मां भुवनेश्वरी देवी को संपूर्ण ब्रह्मांड की स्वामिनी, सृष्टि की मूल शक्ति और आकाश तत्व का प्रतीक माना जाता है। इन्हें देवी पार्वती का एक रूप भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब संसार में असुरों का अत्याचार बढ़ गया तो देवी-देवताओं की प्रार्थना पर मां भुवनेश्वरी का प्राकट्य हुआ। उन्होंने भगवान शिव के साथ मिलकर राक्षस अंधकासुर का संहार किया और संसार में संतुलन स्थापित किया।

माता के भव्य मंदिर में आठ खंभों वाला सुंदर मंडपम है, जिसके हर खंभा में मां के अलग-अलग अवतारों का बखान मिलता है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर नक्काशी बेहद खूबसूरत है। मंदिर की ऊंचाई इतनी है कि वहां से पूरा जमशेदपुर शहर और आसपास का मनमोहक नजारा दिखाई देता है। यहां पुजारियों द्वारा दिन में तीन बार दक्षिण भारतीय रीति-रिवाज से पूजा की जाती है। भक्तों को प्रसाद भी वितरित किया जाता है।

माता के दरबार आने वाले भक्तों की मान्यता है कि मां भुवनेश्वरी के दर्शन से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं। मां की उपासना से आध्यात्मिक बल, सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त होती है।

मंदिर आने वाले भक्तों व पर्यटकों के लिए आसपास और भी अन्य आकर्षण हैं। जमशेदपुर घूमने आए पर्यटक मंदिर के साथ-साथ अन्य जगहों का भी आनंद ले सकते हैं। जुबली पार्क में चिड़ियाघर, गुलाब का बगीचा और झील है। टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में बाघ, शेर, हाथी आदि देखे जा सकते हैं। डिमना झील और जयंती सरोवर झील नौका विहार और पिकनिक के लिए बेस्ट हैं।

इसके अलावा, सर दोराबजी टाटा पार्क शांत वातावरण में घूमने के लिए अच्छी जगह है। जो लोग शांति, आस्था और सुंदर नजारों की तलाश में हैं, उनके लिए भुवनेश्वरी मंदिर जमशेदपुर की सबसे खास जगहों में से एक है।

जमशेदपुर स्थित मंदिर जाने के लिए निकटतम सोनारी हवाई अड्डा (आईएक्सआर) है। वहीं, निकटतम रेलवे स्टेशन टाटानगर जंक्शन रेलवे स्टेशन (टाटा) है। स्टेशन या एयरपोर्ट से कैब या टैक्सी करके मंदिर तक जाया जा सकता है।

--आईएएनएस

एमटी/डीकेपी

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