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जम्‍मू-कश्‍मीर: दक्षिण कश्मीर में चार काले भालू पकड़े गए, वन्यजीव विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन सफल


श्रीनगर, 7 नवंबर (आईएएनएस)। जम्‍मू-कश्‍मीर वन्यजीव संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि दक्षिण कश्मीर के इलाकों में इंसानी बस्तियों के पास पाए गए चार काले भालुओं को पकड़ लिया गया है।

श्रीनगर, 7 नवंबर (आईएएनएस)। जम्‍मू-कश्‍मीर वन्यजीव संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि दक्षिण कश्मीर के इलाकों में इंसानी बस्तियों के पास पाए गए चार काले भालुओं को पकड़ लिया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने अनंतनाग जिले के कोकरनाग इलाके में 'बचू सगम' में 500 किलो वजनी एक नर भालू को ट्रैंक्विलाइजर (बेहोश करने वाली दवा) देकर सफलतापूर्वक काबू कर लिया। इसके अलावा, 'सीर वन्यजीव नियंत्रण कक्ष' द्वारा 'अशमाकुम' में लगाए गए पिंजरों में तीन अन्य भालुओं को पकड़ा गया।

अधिकारियों के मुताबिक, दिन भर चले इस ऑपरेशन के दौरान 'वन्यजीव दक्षिण प्रभाग बिजबेहरा' ने इन चारों भालुओं को जिंदा पकड़ लिया। इन जंगली भालुओं को कुछ समय तक निगरानी में रखा जाएगा और उसके बाद उन्हें वापस उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।

जंगली भालू, खासकर एशियाई काले भालू, अब अक्सर जंगलों से निकलकर कश्मीर घाटी के रिहायशी इलाकों, यूनिवर्सिटी परिसरों और गांवों में आ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन और सर्दियों का मौसम छोटा या कम ठंडा होने की वजह से भालुओं के प्राकृतिक 'हाइबरनेशन' (शीतनिद्रा) चक्र पर असर पड़ा है, जिससे वे लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं।

सेब के बागों का विस्तार, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव और जंगलों के बफर जोन (जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच का इलाका) कम होने के कारण, जंगली जानवर भोजन की तलाश में इंसानी बस्तियों के करीब आ रहे हैं। वन्यजीव संरक्षण कानूनों और शिकार पर लगी रोक के चलते जंगली भालुओं की आबादी में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है, जिससे इंसानी बस्तियों के साथ उनका आमना-सामना भी बढ़ गया है।

श्रीनगर (यूनिवर्सिटी परिसरों सहित), अनंतनाग, गांदरबल, बांदीपोरा और कुपवाड़ा जिलों के कई हिस्सों में भालुओं को घूमते हुए देखा गया है।

काले भालुओं के दिखने की घटनाओं के साथ-साथ, कश्मीर घाटी में अन्य जंगली जानवरों के भी इंसानी बस्तियों में आने के मामले बढ़े हैं। इनमें सबसे प्रमुख कॉमन लेपर्ड (तेंदुआ) है। इसके अलावा कई अन्य प्रजातियां भी भोजन की तलाश में इधर-उधर आ रही हैं।

तेंदुए अब इंसानी इलाकों में रहने के काफी आदी हो गए हैं। वे छिपने के लिए घने सामाजिक वानिकी वाले इलाकों, नर्सरी और सेब के बड़े बागों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

कस्बों और गांवों के पास कचरे के खराब प्रबंधन की वजह से वहां लावारिस कुत्तों की संख्या बढ़ गई है, जो इन जंगली जानवरों के लिए भोजन का एक आसान स्रोत बन गए हैं। इसके अलावा, स्थानीय पालतू जानवर और मुर्गियां भी इनके लिए भोजन का जरिया बन रहे हैं।

इन जानवरों के बार-बार दिखने और बचाव अभियानों के कारण कई जिलों में दहशत का माहौल है। हाल के हफ्तों में, जम्मू-कश्मीर वन्यजीव संरक्षण विभाग ने बडगाम डिग्री कॉलेज रोड, बारामूला की आवासीय कॉलोनियों (जैसे माइक्रोवेव कॉलोनी) और गांदरबल तथा कुलगाम के गांवों के पास देखे गए तेंदुओं को सफलतापूर्वक पकड़कर दूसरी जगहों पर स्थानांतरित किया है।

जम्मू-कश्मीर वन्यजीव संरक्षण विभाग ने आवारा जानवरों को बेहोश करके पकड़ने के लिए 'रैपिड-रिस्पॉन्स' टीमें और कंट्रोल रूम तैनात किए हैं। इन जानवरों को अक्सर उनके प्राकृतिक आवासों, जैसे दाचीगाम नेशनल पार्क, में वापस छोड़ दिया जाता है।

अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को सलाह दी है कि वे फसल कटाई के मुख्य समय और सर्दियों की शुरुआत के दौरान सावधानी बरतें। पालतू जानवरों को सुरक्षित रखें और यदि उन्हें कोई जंगली जानवर दिखे तो तुरंत स्थानीय वन्यजीव कंट्रोल रूम को सूचित करें।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी

Date & Time : 2026-11-07 22:40:02

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