श्रीनगर, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में रेत निकालते समय दो युवक जिंदा दब गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
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श्रीनगर, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में रेत निकालते समय दो युवक जिंदा दब गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को जिले के रफियाबाद इलाके के दचनपोरा में रेत निकालते समय दो युवक रेत के नीचे दब गए, जिससे उनकी मौत हो गई।
यह हादसा देर रात दचनपोरा में हुआ, जब रेत निकालते समय रेत का ढेर ढह गया और दोनों युवक वहीं दब गए।
उनके शव पूरी रात रेत में दबे रहे और बुधवार सुबह स्थानीय लोगों की कड़ी मशक्कत के बाद निकाले जा सके। अधिकारियों ने बताया कि इस घटना की सूचना पुलिस को भी दी गई, जिसके बाद पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और शवों को बाहर निकालने में मदद की।
मृतकों की पहचान 28 वर्षीय जावेद अहमद मीर और 29 वर्षीय मोहम्मद अनीस मलिक के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों दचनपोरा के ही रहने वाले थे। दोनों के शव मिलने के बाद पूरे गांव में मातम छा गया।
पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया है और मौतों से जुड़े हालात की जांच शुरू कर दी है। अभी और जानकारी का इंतजार है।
जम्मू-कश्मीर में निर्माण उद्योग के लिए रेत निकालना एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि है, लेकिन इसमें अवैध खनन, पर्यावरण को नुकसान और सुरक्षा संबंधी गंभीर चुनौतियां भी शामिल हैं।
'जम्मू-कश्मीर माइनर मिनरल कंसेशन, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन एंड प्रिवेंशन ऑफ इलीगल माइनिंग रूल्स, 2016' के तहत छोटे खनिजों के खनन को नियंत्रित किया जाता है। इसमें नदी तल से मिलने वाली सामग्री (आरबीएम) जैसे रेत, गाद, बजरी और पत्थर शामिल हैं।
कानूनी रूप से खनन करने के लिए एक स्वीकृत माइनिंग प्लान, पर्यावरण मंजूरी (ईसी) और संबंधित अधिकारियों से काम करने की अनुमति (कंसेंट टू ऑपरेट) लेना जरूरी है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) अक्सर नदी तल में बिना अनुमति या बिना नियम-कानून के किए जाने वाले खनन पर जुर्माना लगाता है।
अक्सर नावों या नदी के किनारों से हाथों से रेत निकालने के काम में डूबने और रेत के ढेर ढहने का बहुत ज्यादा खतरा रहता है।
इस महीने की शुरुआत में, बारामूला जिले के पट्टन इलाके में, सिंगपोरा में रेत निकालते समय सिर पर गंभीर चोट लगने से 17 वर्षीय एक लड़के की मौत हो गई थी।
--आईएएनएस
डीकेएम/एबीएम
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