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जन्माष्टमी पर गुजरात के मुस्लिम आर्टिस्ट ने बनाईं भगवान कृष्ण की अनोखी ऑयल पेंटिंग, बोले- 'द्वारका से है दिल का नाता'


जामनगर, 3 सितंबर (आईएएनएस)। जन्माष्टमी के पवित्र त्योहार के मौके पर गुजरात के जामनगर में रहने वाले खुंभिया फखरुद्दीन अली, जिन्हें केएफ अली के नाम से भी जाना जाता है, ने कैनवस पर भगवान कृष्ण की भक्ति और जन्माष्टमी की भावना को दिखाते हुए एक अनोखी ऑयल पेंटिंग तैयार की है। यह पेंटिंग सिर्फ रंगों और लाइनों का कॉम्बिनेशन नहीं है, बल्कि पिछले 8 से 10 दिनों से द्वारका शहर के साथ आस्था, प्यार और इमोशनल जुड़ाव की एक कलात्मक अभिव्यक्ति है।

जामनगर, 3 सितंबर (आईएएनएस)। जन्माष्टमी के पवित्र त्योहार के मौके पर गुजरात के जामनगर में रहने वाले खुंभिया फखरुद्दीन अली, जिन्हें केएफ अली के नाम से भी जाना जाता है, ने कैनवस पर भगवान कृष्ण की भक्ति और जन्माष्टमी की भावना को दिखाते हुए एक अनोखी ऑयल पेंटिंग तैयार की है। यह पेंटिंग सिर्फ रंगों और लाइनों का कॉम्बिनेशन नहीं है, बल्कि पिछले 8 से 10 दिनों से द्वारका शहर के साथ आस्था, प्यार और इमोशनल जुड़ाव की एक कलात्मक अभिव्यक्ति है।

आर्टिस्ट ने पिछले 8 से 10 दिनों की लगातार मेहनत और कॉन्संट्रेशन से इस खास पेंटिंग को आकार दिया है। पेंटिंग में भगवान कृष्ण की बांसुरी, द्वारका के आध्यात्मिक अनुभव और जन्माष्टमी से जुड़ी अलग-अलग भावनाओं को एक ही कैनवस पर खूबसूरती से दिखाया गया है। खास बात यह है कि यह काम एकता, भक्ति और कला के अनोखे संगम का संदेश देता है। कलाकार का मानना ​​है कि भक्त और भगवान के बीच का रिश्ता किसी भौतिक धागे से नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम और अटूट भक्ति से जुड़ा होता है।

फखरुद्दीन अली ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मेरी अधिकतर पेंटिंग्स भगवान कृष्ण की दिव्य लीलाओं और द्वारका शहर से प्रेरित हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि मैंने अपनी जिंदगी के कुछ सबसे अहम और यादगार साल, जिन्हें मैं अपना सुनहरा दौर मानता हूं, भगवान कृष्ण के पवित्र शहर द्वारका में बिताए हैं। इसीलिए भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका से मेरा दिल और मोहब्बत का नाता है।"

खुंभिया फखरुद्दीन अलीभा को बचपन से ही पेंटिंग से खास लगाव था। उन्होंने सिर्फ 11 साल की उम्र से ही पेंटिंग के क्षेत्र में दिलचस्पी दिखाई। समय के साथ, यह शौक उनकी पहचान बन गया और आज उन्हें पेंटिंग के क्षेत्र में लगभग 40 सालों का लंबा अनुभव है। कैनवस पर ऑयल पेंटिंग करने का उनका अनोखा स्टाइल उनकी कला की खासियत है।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, "पेंटिंग मेरे परिवार की परंपरा का हिस्सा रही है। मैं खुद 11 साल की उम्र से पेंटिंग कर रहा हूं। मेरी अधिक से अधिक अनोखी ऑयल पेंटिंग होती हैं।"

उन्हें काम के सिलसिले में लंबे समय तक द्वारका शहर में रहने का मौका मिला। इस दौरान द्वारका की धरती, भगवान द्वारकाधीश की भक्ति और यहां के आध्यात्मिक माहौल का उनके मन पर गहरा असर पड़ा।

समय के साथ, द्वारका से उनका एक गहरा भावनात्मक रिश्ता बन गया और वे कृष्ण भक्ति से भी जुड़ गए। वे अपनी पेंटिंग के जरिए भगवान कृष्ण के प्रति अपनी भावनाओं और आस्था को दिखाते हैं। हर साल, वह जन्माष्टमी के पवित्र त्योहार के मौके पर भगवान द्वारकाधीश को समर्पित एक खास पेंटिंग तैयार करने की कोशिश करते हैं। इस साल भी, उन्होंने अपनी इस कलात्मक परंपरा को आगे बढ़ाया है और भगवान कृष्ण को समर्पित यह खूबसूरत ऑयल पेंटिंग तैयार की है।

उन्होंने आईएएनएस को बताया कि वे पिछले 5-7 साल से जन्माष्टमी महोत्सव के ऊपर भगवान श्रीकृष्ण को लेकर अलग तरीके से कैनवस पर कोई न कोई पेंटिंग तैयार करने की कोशिश करते हैं। इस साल उन्होंने भगवान कृष्ण की तीन तस्वीरें बनाई हैं।

--आईएएनएस

डीसीएच/

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