Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

जेब में नहीं थे पैसे, बच्चों को पढ़ाकर चलाया खर्च, फिर 'खइके पान बनारस वाला' से छा गए अंजान


मुंबई, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदी फिल्मों में कई ऐसे गीतकार हुए, जिनके लिखे गाने दशकों बाद भी लोगों की जुबान पर हैं। ऐसे ही गीतकार थे अंजान, जिनके लिखे 'खइके पान बनारस वाला', 'ओ साथी रे' और 'रोते हुए आते हैं सब' जैसे गाने आज भी लोगों को पसंद आते हैं।

मुंबई, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदी फिल्मों में कई ऐसे गीतकार हुए, जिनके लिखे गाने दशकों बाद भी लोगों की जुबान पर हैं। ऐसे ही गीतकार थे अंजान, जिनके लिखे 'खइके पान बनारस वाला', 'ओ साथी रे' और 'रोते हुए आते हैं सब' जैसे गाने आज भी लोगों को पसंद आते हैं।

हालांकि, इन यादगार गानों को लिखने वाले अंजान के लिए फिल्मी दुनिया में अपनी जगह बनाना आसान नहीं था। एक समय ऐसा भी था, जब उन्हें अपना खर्च चलाने के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना पड़ता था। बाद में उन्होंने अपनी लेखनी के दम पर हिंदी सिनेमा में ऐसी पहचान बनाई कि अमिताभ बच्चन की कई फिल्मों के गाने उनकी पहचान बन गए।

अंजान का असली नाम लालजी पांडेय था। उनका जन्म 28 अक्टूबर 1930 को उत्तर प्रदेश के बनारस में हुआ था। बचपन से ही उन्हें कविता और शायरी का शौक था। उन्हें शब्दों से खेलना और अपनी बातों को कविता के जरिए कहना पसंद था। बनारस में रहते हुए उनकी कविताएं स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में छपने लगी थीं। वह कवि सम्मेलनों और काव्य गोष्ठियों में भी हिस्सा लेते थे। इसी शौक ने आगे चलकर उन्हें फिल्मी गीतकार बनने का रास्ता दिखाया।

अंजान ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई का रुख किया। लेकिन, यहां पहुंचने के बाद उन्हें तुरंत काम नहीं मिला। फिल्मों में पहचान बनाने के लिए उन्हें कई सालों तक संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान घर का खर्च चलाना भी आसान नहीं था। वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे और इसी कमाई से अपनी जरूरतें पूरी करते थे। उनके सामने एक तरफ रोजी-रोटी की चिंता थी, तो दूसरी तरफ फिल्मों में गीत लिखने का सपना। उन्होंने मुश्किल हालात के बावजूद लिखना नहीं छोड़ा और मौके का इंतजार करते रहे।

आखिरकार 1953 में उन्हें प्रेमनाथ की फिल्म 'प्रिजनर ऑफ गोलकोंडा' में गीत लिखने का मौका मिला। इसे उनके फिल्मी करियर की शुरुआत माना जाता है। इस फिल्म के लिए उन्होंने 'लहर ये डोले कोयल बोले' और 'शहीदों अमर है तुम्हारी कहानी' जैसे गीत लिखे। वह लगातार काम करते रहे और छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए गीत लिखते रहे। उनके करियर में 1963 में आई फिल्म 'गोदान' एक अहम पड़ाव बनी। पंडित रविशंकर के संगीत से सजी इस फिल्म के गीतों ने लोगों का ध्यान खींचा। इसमें उन्होंने 'हियरा जरत जरत', 'पिपरा के पतवा' और 'जनम लियो ललना' जैसे गाने लिखे।

इसके बाद उनके लिए काम के नए रास्ते खुलने लगे। उन्होंने कल्याणजी-आनंदजी, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, आर.डी. बर्मन और बप्पी लाहिड़ी जैसे संगीतकारों के साथ काम किया। फिल्म 'बंधन' का 'बिना बदरा के बिजुरिया' भी उनके चर्चित गीतों में शामिल है।

अमिताभ बच्चन की फिल्मों के लिए लिखे गए गानों ने अंजान को खास पहचान दिलाई। फिल्म 'डॉन' का 'खइके पान बनारस वाला' उनके सबसे लोकप्रिय गीतों में शामिल है। वहीं, 'मुकद्दर का सिकंदर' के 'ओ साथी रे' और 'रोते हुए आते हैं सब' ने भी दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। फिल्म 'याराना' का 'तेरे जैसा यार कहां' और 'नमक हलाल' का 'पग घुंघरू बांध' भी उनके यादगार गानों में शामिल हैं।

अंजान ने अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों के लिए 1,500 से ज्यादा गाने लिखे। उन्होंने हिंदी फिल्मों के साथ भोजपुरी सिनेमा में भी काम किया। भोजपुरी फिल्म 'बलम परदेसिया' के गानों को भी काफी पसंद किया गया। अंजान ने अपने जीवन के आखिरी दिनों तक लेखन से रिश्ता बनाए रखा। उनकी कविताओं की किताब 'गंगा तट का बंजारा' 1997 में प्रकाशित हुई थी। बताया जाता है कि अमिताभ बच्चन ने उनकी इस किताब का विमोचन किया था। 3 सितंबर 1997 को मुंबई में उनका निधन हो गया। उस समय उनकी उम्र 66 साल थी।

--आईएएनएस

पीके/एबीएम

Date & Time : 2026-10-27 18:35:10

Share:

Leave A Reviews

Related News