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जेसीडी प्रभाकर को तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में चुने जाने पर बधाई: ओम बिरला


नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जेसीडी प्रभाकर को तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष बनने पर बधाई दी है। स्पीकर बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि जेसीडी प्रभाकर को तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में सर्वसम्मति से चुने जाने पर हार्दिक बधाई। मुझे आशा है कि आपके कुशल नेतृत्व में सदन लोकतांत्रिक आदर्शों और विधायी परंपराओं को और मजबूत करेगा। आपके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं।

नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जेसीडी प्रभाकर को तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष बनने पर बधाई दी है। स्पीकर बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि जेसीडी प्रभाकर को तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में सर्वसम्मति से चुने जाने पर हार्दिक बधाई। मुझे आशा है कि आपके कुशल नेतृत्व में सदन लोकतांत्रिक आदर्शों और विधायी परंपराओं को और मजबूत करेगा। आपके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं।

इससे पहले 12 मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एस. जोसेफ विजय ने सचिवालय के भीतर स्थित अध्यक्ष कक्ष में विधानसभा अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने वाले जेसीडी प्रभाकर को स्वर्ण शॉल भेंट की और बधाई देते हुए फूलों का गुलदस्ता भी भेंट किया।

तमिलनाडु के विधायक जेसीडी प्रभाकर सर्वसम्मति से विधानसभा अध्यक्ष चुने गए हैं। थोरैयूर निर्वाचन क्षेत्र से तमिलनाडु के विधायक रवि शंकर भी सर्वसम्मति से उपाध्यक्ष चुने गए।

विधानसभा अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया में 12 मई को सदन में बैठक बुलाई गई। इस दौरान कार्यवाहक विधानसभा अध्यक्ष एमवी करुपैया बताया कि मुख्यमंत्री सी. जोसफ ने जेसीडी प्रभाकर के नाम का प्रस्ताव रखा और उनको निर्विरोध चुन लिया गया। इसके साथ ही करुपैया ने कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यकाल समाप्त होने की घोषणा की।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को लोकतांत्रिक परंपराओं के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह बात तमिलनाडु विधानसभा में तब कही जब टीवीके विधायक जेसीडी प्रभाकर निर्विरोध स्पीकर चुने गए।

सदन में बोलते हुए, विजय ने याद दिलाया कि राजशाही युग के दौरान इंग्लैंड में स्पीकर किस प्रकार संसद के निर्णयों को राजा तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे, अक्सर व्यक्तिगत रूप से बहुत बड़ा जोखिम उठाते हुए।

विजय ने कहा, "संसद द्वारा किसी भी प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने पर अध्यक्ष की यह जिम्मेदारी होती थी कि वह राजा को सूचित करे। उन दिनों राजाओं के पास मृत्युदंड देने का भी अधिकार होता था, और संसद का रुख बताने पर अध्यक्षों को कभी-कभी गंभीर दंड का सामना करना पड़ता था।"

उन्होंने संसद की उस पुरानी प्रथा का भी जिक्र किया, जिसमें नव निर्वाचित अध्यक्ष प्रतीकात्मक रूप से कुर्सी पर बैठने में हिचकिचाते थे और सदन और विपक्ष के नेताओं द्वारा उन्हें कुर्सी तक ले जाया जाता था।

मुख्यमंत्री ने टिप्पणी करते हुए कहा, "वह परंपरा आज भी लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक के रूप में जारी है।"

--आईएएनएस

एमएस/

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