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झारखंड भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने अमित शाह से की मुलाकात, राज्य के समसामयिक मुद्दों पर हुई चर्चा


रांची, 19 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड भाजपा के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में हुई इस मुलाकात में झारखंड से जुड़े कई समसामयिक राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा हुई।

रांची, 19 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड भाजपा के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में हुई इस मुलाकात में झारखंड से जुड़े कई समसामयिक राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। गृह मंत्री ने प्रदेश भाजपा नेताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन दिया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास और चंपाई सोरेन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय और दीपक प्रकाश तथा संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह शामिल थे।

झारखंड भाजपा के लगभग सभी प्रमुख नेताओं की मौजूदगी को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक ऐसे समय हुई है जब झारखंड में खनिज और खनन से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक टकराव की जमीन तैयार हो रही है। केंद्र सरकार के खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 यानी एमएमडीआर विधेयक के खिलाफ झामुमो समेत विपक्षी दल आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

झामुमो ने 20 अगस्त को पार्टी की बड़ी बैठक बुलाई है, जिसमें विधेयक के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि अमित शाह के साथ हुई बैठक में एमएमडीआर विधेयक को लेकर झारखंड में बन रही राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई। हालांकि, भाजपा की ओर से बैठक के एजेंडे को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

झामुमो विधेयक को झारखंड के खनिज संपदा और राज्य के अधिकारों से जोड़कर इसका विरोध कर रहा है। ऐसे में भाजपा के लिए भी इस मुद्दे पर पार्टी की राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति महत्वपूर्ण हो गई है। भाजपा इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के पक्ष को मजबूती से रखने के साथ राज्य में राजनीतिक जवाब देने की तैयारी कर सकती है।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीकेपी

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