Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

जो सिनेमा आपको असहज करे, वही सोच बदलने की ताकत रखता है: नंदिता दास

नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम 'सशक्त नारी, विकसित भारत' में अभिनेत्री-निर्देशक नंदिता दास ने अपने अनुभव और विचार पेश किए। इस बीच अभिनेत्री-निर्देशक नंदिता दास ने आईएएनएस से बात करते हुए सिनेमा, सेंसरशिप, राजनीति और महिलाओं के अधिकारों जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी।

नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम 'सशक्त नारी, विकसित भारत' में अभिनेत्री-निर्देशक नंदिता दास ने अपने अनुभव और विचार पेश किए। इस बीच अभिनेत्री-निर्देशक नंदिता दास ने आईएएनएस से बात करते हुए सिनेमा, सेंसरशिप, राजनीति और महिलाओं के अधिकारों जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी।

आईएएनएस ने जब उनसे सवाल किया, ''आपने अक्सर ऐसी फिल्में चुनी हैं जो लोगों को सोचने पर मजबूर करती हैं। क्रिएटिव स्पेस के तौर पर आपको असहजता की ओर क्या खींचता है?''

इस सवाल पर जवाब देते हुए नंदिता दास ने कहा, "मेरे लिए सिनेमा का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं है। जो कहानियां दर्शकों को झकझोरती हैं, उनके पूर्वाग्रहों और सोच को चुनौती देती हैं, और भीतर कहीं संवेदना जगाती हैं, वही सिनेमा मुझे आकर्षित करता है। व्यक्तिगत रूप से भी मुझे वही फिल्में पसंद आती हैं जो लोगों को सोचने पर मजबूर करें, और यही वजह है कि मैं ऐसी ही फिल्में बनाना चाहती हूं।"

इसके बाद आईएएनएस ने उनसे सवाल पूछा कि जब उनके काम या विचारों को 'राजनीतिक' कहकर लेबल कर दिया जाता है, तब वह आलोचना और विरोध का सामना कैसे करती हैं। इस पर नंदिता दास ने कहा, "जब भी कोई कलाकार ऐसी बात कहता है जो मौजूदा व्यवस्था को चुनौती देती है, तो प्रतिक्रिया आना तय है। कुछ लोग समर्थन करेंगे और कुछ लोग विरोध। दूसरों की राय से बहुत ज्यादा प्रभावित होना व्यक्ति को भीतर से कमजोर कर सकता है। समाज में लोगों को लेबल करना आसान होता है, क्योंकि इससे किसी को गहराई से समझने की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन अगर आपके भीतर किसी बात को लेकर गहरी आस्था और विश्वास है, तो वही आपको आगे बढ़ने की ताकत देता है। ऐसे में आलोचनाएं आपके सफर को नहीं रोक पातीं।"

आईएएनएस ने नंदिता दास से 'केरल स्टोरी 2' को लेकर चल रहे विवाद और सेंसरशिप पर भी सवाल किया। इस पर नंदिता दास ने सेंसरशिप को कला के लिए दम तोड़ने वाला बताया। उन्होंने कहा, ''किसी भी कला के रूप के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बेहद जरूरी है। जब कला को खुलकर सांस लेने की आजादी मिलती है, तभी अच्छा और बुरा दोनों तरह का काम सामने आता है। यही प्रक्रिया समाज को समझदार बनाती है और समय के साथ लोग खुद तय करते हैं कि क्या मूल्यवान है और क्या नहीं। मैं किसी भी तरह की सेंसरशिप के पक्ष में नहीं हूं।''

वैश्विक मुद्दे पर भी नंदिता दास से सवाल किया गया। आईएएनएस ने जब उनसे तालिबान द्वारा महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा को कानूनी मान्यता देने जैसी खबरों पर प्रतिक्रिया मांगी, तो इस पर नंदिता ने कहा, ''किसी भी धर्म, राजनीति या व्यवस्था के नाम पर किसी भी समुदाय, खासकर महिलाओं को दबाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। एक बेहतरीन समाज बनने के लिए हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी। मैं अपनी सीमित क्षमता में, चाहे अपने काम के जरिए हो, अपने शब्दों के जरिए हो या अपनी अभिव्यक्ति के किसी भी माध्यम से, ऐसे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती रहूंगी। अगर हम एक मानवीय दुनिया चाहते हैं, तो हमें अन्याय का विरोध करना होगा।''

--आईएएनएस

पीके/डीकेपी

Share:

Leave A Reviews

Related News