अम्मान, 20 मई (आईएएनएए)। जॉर्डन ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और युगांडा से आने वाले यात्रियों के देश में प्रवेश पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की है। यह कदम दोनों देशों में इबोला वायरस के फैलाव के बाद उठाया गया है।
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अम्मान, 20 मई (आईएएनएए)। जॉर्डन ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और युगांडा से आने वाले यात्रियों के देश में प्रवेश पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की है। यह कदम दोनों देशों में इबोला वायरस के फैलाव के बाद उठाया गया है।
जॉर्डन के गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस प्रतिबंध से जॉर्डन के नागरिकों को छूट दी गई है। यह रोक बुधवार से लागू होगी और 30 दिनों तक जारी रहेगी।
बयान में यह भी कहा गया है कि वैश्विक स्वास्थ्य अपडेट के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंगलवार को डीआरसी में फैल रहे इबोला प्रकोप की तेजी और बड़े पैमाने पर गहरी चिंता जताई है, जिसमें 136 लोगों की मौत हो चुकी है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा कि इस प्रकोप से 130 से ज्यादा मौतें जुड़ी हुई मानी जा रही हैं और 500 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं।
इबोला एक गंभीर बीमारी है, जो अक्सर जानलेवा होती है और इंसानों के साथ-साथ अन्य प्राइमेट (बंदर जैसी प्रजातियों) को भी प्रभावित करती है।
यह वायरस आमतौर पर जंगली जानवरों जैसे चमगादड़, साही और कुछ बंदर प्रजातियों से इंसानों में फैलता है। इसके बाद यह इंसानों में संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ, अंगों या अन्य स्राव के सीधे संपर्क से फैलता है। यह उन सतहों और चीजों से भी फैल सकता है जो इन तरल पदार्थों से दूषित हो गई हों, जैसे बिस्तर या कपड़े।
इबोला की औसत मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत होती है। पिछले प्रकोपों में यह दर 25 से 90 प्रतिशत तक रही है।
इबोला का पहला प्रकोप मध्य अफ्रीका के दूर-दराज गांवों में, घने उष्णकटिबंधीय जंगलों के पास हुआ था। 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका में हुआ प्रकोप अब तक का सबसे बड़ा और सबसे जटिल इबोला प्रकोप था। इसमें अन्य सभी प्रकोपों से ज्यादा मामले और मौतें हुई थीं। यह बीमारी देशों की सीमाएं पार करके फैली थी। गिनी से शुरू होकर सिएरा लियोन और लाइबेरिया तक पहुंच गई थी।
इबोला के लक्षण अचानक शुरू हो सकते हैं, जिनमें बुखार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश शामिल हैं। इसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, शरीर पर दाने और किडनी तथा लीवर के काम करने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों के लिए इन लक्षणों पर खास नजर रखना बहुत जरूरी होता है।
--आईएएनएस
एवाई/एएस
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