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कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल और झारखंड में 4,474 करोड़ रुपए के दो मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी

नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। देश में रेलवे कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल और झारखंड में 4,474 करोड़ रुपए की लागत वाले दो मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है।

नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। देश में रेलवे कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल और झारखंड में 4,474 करोड़ रुपए की लागत वाले दो मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है।

इन दो मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स में सैंथिया-पाकुर चौथी लाइन और संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन शामिल हैं, जो कि पश्चिम बंगाल और झारखंड के 5 जिलों को कवर करती हैं, जिससे भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में 192 किलोमीटर की वृद्धि होगी।

2030-31 तक पूरी होने वाली इन स्वीकृत मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स से लगभग 5,652 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिनकी आबादी लगभग 1.47 करोड़ है।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों, जैसे बोलपुर-शांतिनिकेतन, नंदिकेश्वरी मंदिर (शक्तिपीठ), तारापीठ (शक्तिपीठ), पटाचित्र ग्राम, धडिका वन, भीमबंध वन्यजीव अभ्यारण्य, रामेश्वर कुंड आदि के लिए रेल संपर्क में सुधार होगा।

बढ़ी हुई रेल क्षमता से आवागमन में वृद्धि होगी, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा। ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए तैयार हैं।

सीसीईए के बयान के अनुसार, "ये प्रोजेक्ट्स प्रधानमंत्री मोदी के 'नए भारत' के विजन के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से 'आत्मनिर्भर' बनाएंगी और उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाएंगी।"

बयान में आगे कहा गया, स्वीकृत परियोजनाएं कोयला, पत्थर, डोलोमाइट, सीमेंट, स्लैग, जिप्सम, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, पीओएल, कंटेनर आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं।

इससे जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में मदद मिलेगी।

ये प्रोजेक्ट्स प्रधानमंत्री-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई हैं, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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