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कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर फर्जी विज्ञापनों से सावधान रहें यात्री : विदेश मंत्रालय


नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर ऑनलाइन प्रसारित किए जा रहे फर्जी विज्ञापनों और घोषणाओं से श्रद्धालुओं को सतर्क रहने की सलाह दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यात्रा से संबंधित आधिकारिक जानकारी केवल सरकार के अधिकृत पोर्टल पर ही उपलब्ध है।

नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर ऑनलाइन प्रसारित किए जा रहे फर्जी विज्ञापनों और घोषणाओं से श्रद्धालुओं को सतर्क रहने की सलाह दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यात्रा से संबंधित आधिकारिक जानकारी केवल सरकार के अधिकृत पोर्टल पर ही उपलब्ध है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "यात्रियों के लिए सावधानी। यह देखा गया है कि विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा से संबंधित फर्जी घोषणाएं और विज्ञापन ऑनलाइन प्रसारित किए जा रहे हैं। ऐसे भ्रामक विज्ञापनों और घोषणाओं से सावधान रहें।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा का एकमात्र आधिकारिक पोर्टल है और श्रद्धालुओं को किसी अन्य वेबसाइट या विज्ञापन के झांसे में नहीं आना चाहिए।

इस बीच, सिक्किम पर्यटन विकास निगम (एसटीडीसी) के अध्यक्ष लुकेंद्र रासैली के अनुसार, यात्रा का पहला जत्था 11 जून को नई दिल्ली पहुंच चुका है, जहां यात्रियों की अनिवार्य चिकित्सीय जांच, फिटनेस परीक्षण, वीजा प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताएं विदेश मंत्रालय की देखरेख में पूरी की जा रही हैं।

पहला जत्था 15 जून को गंगटोक पहुंचेगा और अनुकूलन (एक्लिमेटाइजेशन) प्रक्रिया पूरी करने के बाद 20 जून को नाथू ला दर्रे के रास्ते चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में प्रवेश करेगा।

नाथू ला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरुआत वर्ष 2015 में वैकल्पिक मार्ग के रूप में की गई थी। इस वर्ष लगभग 1,500 आवेदनों में से कंप्यूटरीकृत लॉटरी के जरिए 500 श्रद्धालुओं का चयन किया गया है। सभी यात्रियों को 50-50 लोगों के 10 जत्थों में भेजा जाएगा और अंतिम जत्था अगस्त में रवाना होने की संभावना है।

गंगटोक पहुंचने के बाद यात्रियों को ऊंचाई वाले क्षेत्रों के अनुकूल बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम से गुजरना होगा। इसके तहत वे पहले 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित '18 माइल' केंद्र में दो रात और उसके बाद लगभग 13,000 फीट ऊंचाई पर स्थित हंगू झील क्षेत्र में दो रात बिताएंगे। इस दौरान स्वास्थ्य परीक्षण और आईटीबीपी की अंतिम मेडिकल जांच के बाद ही उन्हें 14,140 फीट ऊंचे नाथू ला दर्रे से तिब्बत में प्रवेश की अनुमति मिलेगी।

तिब्बत पहुंचने के बाद श्रद्धालु कांगमा, लाजी, झोंगबा और दारचेन होते हुए पवित्र कैलाश पर्वत की परिक्रमा करेंगे, जिसमें दिरापुक और जुथुलपुक जैसे प्रमुख पड़ाव शामिल हैं। पूरी यात्रा 22 दिनों की होगी, जिसमें दिल्ली में दस्तावेजी और स्वास्थ्य संबंधी प्रक्रियाओं के लिए चार दिन, सिक्किम में अनुकूलन के लिए कई दिन और तिब्बत में लगभग 12 दिन का प्रवास शामिल है।

कोविड-19 महामारी और अन्य कारणों से लंबे समय तक बाधित रहने के बाद 2025 में यात्रा दोबारा शुरू हुई थी। अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष यात्रियों के लिए आवास, चिकित्सा सुविधाओं और संपर्क व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत बनाया गया है।

--आईएएनएस

डीएससी

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