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कमल की तरह स्थिर करेगा तन और मन, जानिए पद्मासन करने की सही विधि और लाभ


नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। योग भारतीय संस्कृति की प्राचीन देन है और इसको अपनाने से तन और मन दोनों ही स्वस्थ्य रहता है। योग के विभिन्न आसनों में पद्मासन विशेष स्थान रखता है। यह शरीर को स्थिरता, मन को एकाग्रता और आत्मा को शांति प्रदान करने वाला अत्यंत प्रभावशाली योग-अभ्यास है।

नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। योग भारतीय संस्कृति की प्राचीन देन है और इसको अपनाने से तन और मन दोनों ही स्वस्थ्य रहता है। योग के विभिन्न आसनों में पद्मासन विशेष स्थान रखता है। यह शरीर को स्थिरता, मन को एकाग्रता और आत्मा को शांति प्रदान करने वाला अत्यंत प्रभावशाली योग-अभ्यास है।

पद्मासन संस्कृत के दो शब्दों 'पद्म' (कमल) और आसन (बैठने की मुद्रा) के मेल से बना है। अंग्रेजी में इस आसन को 'लोटस पोज' भी कहा जाता है। यह आसन शरीर को मुख्य रूप से ध्यान और प्राणायाम के लिए आधार तैयार करता है।

केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, पद्मासन एक स्थिर और सुखदायक ध्यानात्मक मुद्रा है, जो मन को शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने में अत्यंत प्रभावी है। यह योग अनुशासन का मूल आधार माना जाता है।

यह आसन आधुनिक जीवन की मानसिक थकान को दूर कर एकाग्रता की नई ऊर्जा भरने का एक दिव्य माध्यम है। बिना किसी उपकरण के केवल सही तकनीक और निरंतर अभ्यास से पद्मासन हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य में क्रांतिकारी बदलाव लाता है।

पद्मासन की मुद्रा में बैठने से पेट की मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ता है, खून का संचार तेज होता है और पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। यह गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार हो सकता है। साथ ही, इसका रोज अभ्यास करने से जोड़ों का लचीलापन बढ़ता है और वे मजबूत होते हैं। जो लोग ज्यादा देर खड़े रहते हैं या चलते हैं, उनके पैरों के दर्द में यह काफी मदद करता है।

पद्मासन में पीठ सीधी रहती है, जिससे रीढ़ की हड्डी सीधी और मजबूत होती है। यह कमर दर्द और झुककर बैठने की आदत को सुधारता है। साथ ही, श्रोणि क्षेत्र में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है, जिससे महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं में भी आराम मिलता है।

इस आसन को करने के दौरान दोनों पैरों को मोड़कर रखा जाता है, जिससे कई लोगों को समस्या होने लगती है। यदि किसी साधक दोनों पैरों को एक साथ रखकर पद्मासन में बैठने में समस्या होती है, तो वह एक पैर को विपरीत जांघ पर रखकर अर्ध-पद्मासन में भी बैठ सकता है। ऐसा तब तक करते रहें जब तक पद्मासन तक पहुंचने के लिए पर्याप्त लचीले महसूस न हो।

हालांकि, जिन लोगों को घुटनों या टखनों में गंभीर दर्द या चोट हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। कमर दर्द की समस्या में इसे विशेषज्ञ की सलाह के बिना न करें।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम

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