संयुक्त राष्ट्र, 23 जुलाई (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने कहा कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) के नॉर्थ किवु प्रांत में असुरक्षा के कारण मानवीय कार्यों पर असर पड़ रहा है, जिसमें इबोला के प्रकोप से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रयास भी शामिल हैं।
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संयुक्त राष्ट्र, 23 जुलाई (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने कहा कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) के नॉर्थ किवु प्रांत में असुरक्षा के कारण मानवीय कार्यों पर असर पड़ रहा है, जिसमें इबोला के प्रकोप से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रयास भी शामिल हैं।
शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने बुधवार (स्थानीय समय) को एक दैनिक ब्रीफिंग में कहा कि स्थानीय नागरिक समाज संगठनों के अनुसार, 13 से 19 जुलाई के बीच प्रांत के बेनी इलाके में हुए कई हमलों में कम से कम 30 लोग मारे गए और एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस हिंसा के कारण आम लोगों को विस्थापित होना पड़ा है और प्रभावित इलाकों में मानवीय सहायता पहुंचाने में रुकावट आ रही है।
डुजारिक ने संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति के कारण, इबोला से निपटने में मदद करने वाले सहयोगियों सहित कम से कम छह मानवीय संगठनों ने बेनी इलाके के कई इलाकों में अपनी आवाजाही रोक दी है।
उन्होंने कहा कि 20 जुलाई तक, डीआरसी के राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने इतुरी, नॉर्थ किवु, साउथ किवु, हौट-उएले और त्शोपो प्रांतों में इबोला के 2,473 कन्फर्म मामलों की रिपोर्ट दी थी।
प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और उसके मानवीय सहयोगी उन सभी इलाकों में निगरानी, प्रयोगशाला परीक्षण, इलाज और समुदाय को शामिल करने वाली गतिविधियों को बढ़ाने में अधिकारियों का समर्थन करना जारी रखे हुए हैं, जहां इबोला वायरस के मामले सामने आए हैं।
उन्होंने कहा, "संयुक्त राष्ट्र सभी पक्षों से आम नागरिकों की सुरक्षा करने और मानवीय सहायता के लिए सुरक्षित और बिना रुकावट पहुंच सुनिश्चित करने की अपनी अपील दोहराता है।" उन्होंने आगे कहा कि प्रकोप को रोकने और ज़रूरतमंद सभी लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए सभी स्वास्थ्य कर्मियों और मानवीय सहायता कर्मियों की सुरक्षा बहुत जरूरी है।
बंडिबुग्यो इबोला वायरस से होने वाले इस प्रकोप की घोषणा 15 मई को की गई थी। तब से यह पांच प्रांतों में फैल चुका है। लोगों की आवाजाही, असुरक्षा, छोटे पैमाने पर खनन गतिविधियां और युगांडा व दक्षिण सूडान के साथ सीमा-पार आवाजाही के कारण यह संक्रमण फैल रहा है।
--आईएएनएस
पीआईएम/पीएम
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