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कर्नाटक की वित्तीय स्थिति खराब, सरकार श्वेत पत्र जारी करे: बोम्मई


हावेरी, 6 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति को "गंभीर संकट" में बताते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से राज्य की आर्थिक हालत पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पिछली सरकार से उसे कैसी वित्तीय स्थिति विरासत में मिली है।

हावेरी, 6 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति को "गंभीर संकट" में बताते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से राज्य की आर्थिक हालत पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पिछली सरकार से उसे कैसी वित्तीय स्थिति विरासत में मिली है।

हावेरी जिले के शिगगांव में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए बोम्मई ने आरोप लगाया कि उत्तर कर्नाटक में करीब 23,000 करोड़ रुपये के लंबित ठेकेदार बिलों को लेकर अधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों पर उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार इन समस्याओं का समाधान कैसे करेगी और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार जिस "सिस्टम" की बात कर रहे हैं, उसका वास्तविक अर्थ क्या है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सिस्टम को दरकिनार नहीं करने की सलाह दी है, लेकिन सरकार खुद स्पष्ट नीति के अभाव में काम कर रही है।

बसवराज बोम्मई ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के पास वित्तीय सुधारों को लेकर कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को श्वेत पत्र जारी कर यह बताना चाहिए कि पिछली सरकार से उसे कितनी देनदारियां मिलीं, कितना कर्ज लिया गया और उसका उपयोग किस मद में किया गया।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि उधार लिए गए धन का इस्तेमाल पूंजीगत व्यय, वेतन, पेंशन, ऋण भुगतान या गारंटी योजनाओं में किस तरह किया गया।

बोम्मई ने दावा किया कि राज्य के 4.5 लाख करोड़ रुपये के बजट का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अनिवार्य खर्चों में चला जाता है और विकास कार्यों के लिए बहुत कम राशि बचती है। उन्होंने पूछा कि ऐसी स्थिति में सरकार कर्नाटक के विकास का नेतृत्व कैसे करेगी।

उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी उनकी सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा, अनावश्यक खर्चों में कटौती की और राजस्व रिसाव रोककर आर्थिक स्थिति को संभाला।

कृषि क्षेत्र का मुद्दा उठाते हुए बोम्मई ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि आंतरिक राजनीतिक मतभेदों और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण जनहित की सरकार का भविष्य अनिश्चित दिखाई दे रहा है। खासकर उत्तर कर्नाटक में सिंचाई संबंधी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।

उन्होंने जल संसाधन विभाग की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्री रामलिंगा रेड्डी इस विभाग को संभालने के इच्छुक नहीं दिख रहे थे, जो सुशासन के लिहाज से अच्छा संकेत नहीं है।

बोम्मई ने आरोप लगाया कि हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में किसानों के लिए बीज और उर्वरक की उपलब्धता जैसे अहम मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में बीज और खाद की कमी की शिकायतें हैं तथा व्यापारी इनका भंडारण कर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। उन्होंने सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर उचित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।

उन्होंने कृषि विभाग के प्रभावी संचालन के लिए जल्द से जल्द आवश्यक निर्णय लेने की भी अपील की।

भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर बोम्मई ने कहा कि पार्टी में विपक्ष के नेता या प्रदेश अध्यक्ष को बदलने को लेकर कोई चर्चा नहीं चल रही है। उन्होंने ऐसी खबरों को पूरी तरह निराधार बताया और कहा कि संगठन को मजबूत करने के लिए केवल संगठनात्मक स्तर पर कुछ बदलाव किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करना है।

--आईएएनएस

डीएससी

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