बेंगलुरु, 18 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने अपने सभी पांच उम्मीदवारों को जीत दिलाकर बड़ी सफलता हासिल की। भाजपा को दो सीटें मिलीं, जबकि उसकी सहयोगी पार्टी जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडी(एस) को हार का सामना करना पड़ा। गुरुवार को घोषित नतीजों में यह तस्वीर सामने आई।
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बेंगलुरु, 18 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने अपने सभी पांच उम्मीदवारों को जीत दिलाकर बड़ी सफलता हासिल की। भाजपा को दो सीटें मिलीं, जबकि उसकी सहयोगी पार्टी जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडी(एस) को हार का सामना करना पड़ा। गुरुवार को घोषित नतीजों में यह तस्वीर सामने आई।
इस परिणाम को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है, जबकि भाजपा और जेडी(एस) के लिए यह झटका है। इसे केंद्रीय मंत्री और जेडी(एस) नेता एचडी कुमारस्वामी के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है, जिन्होंने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का विषय बनाया था और मुख्यमंत्री शिवकुमार को खुली चुनौती दी थी।
कांग्रेस ने अपेक्षा से अधिक समर्थन हासिल करते हुए 11 अतिरिक्त वोट प्राप्त किए। इनमें भाजपा के तीन विधायकों और जेडी(एस) के छह विधायकों के कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने की बात सामने आई है।
कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''आज कर्नाटक के इतिहास में एक बड़ा दिन है। यह सिर्फ कांग्रेस के पांच उम्मीदवारों की जीत नहीं, बल्कि कर्नाटक की जनता की जीत है। राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया है।''
उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद, वरिष्ठ नेता बीएस शिवन्ना, वरिष्ठ नेता टिप्पणप्पा कामकानूर, एआईसीसी सचिव पीवी मोहन और कांग्रेस कोषाध्यक्ष विनय कार्तिक पहले ही दौर की मतगणना में विजयी हो गए।
सुरजेवाला ने कहा, ''हमारे अनुमान के अनुसार कांग्रेस को 138 विधायकों का समर्थन प्राप्त था, जिसमें 135 कांग्रेस विधायक, एसकेपी के एक सदस्य और दो निर्दलीय शामिल थे, लेकिन अंततः हमारे उम्मीदवारों को 151 विधायकों का समर्थन मिला, जो हमारी अपेक्षा से कहीं अधिक था।''
उन्होंने कहा, ''इसके विपरीत भाजपा, जिसके पास दो निर्दलीयों समेत 64 विधायकों का समर्थन था, उसे केवल 56 प्रथम वरीयता वोट मिले, जबकि भाजपा का एक वोट अमान्य घोषित कर दिया गया। वहीं 18 सदस्यों वाली जेडी-एस को केवल 14 वोट मिले।''
सुरजेवाला ने कहा, ''मैं कर्नाटक की जनता, कांग्रेस कार्यकर्ताओं, कांग्रेस विधायकों और उन सभी लोगों का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने कांग्रेस उम्मीदवारों का समर्थन किया।''
भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने कहा, ''भाजपा उम्मीदवार लिंगराज पाटिल और रघु कौटिल्य विधान परिषद चुनाव में विजयी हुए हैं। हम उन्हें बधाई देते हैं। मतदान के पैटर्न से यह स्पष्ट हुआ है कि हमारे तीन वोट दूसरी तरफ गए हैं।''
उन्होंने कहा, ''हम यह पता लगाएंगे कि किसने विपक्ष के पक्ष में मतदान किया और पार्टी इस पर उचित निर्णय लेगी। जीत की खुशी है, लेकिन हम अपनी गलतियों को भी सुधारेंगे।''
विजयी उम्मीदवारों में बीके हरिप्रसाद को 30 वोट, टिप्पणप्पा कामकानूर को 30 वोट, पीवी मोहन को 30 वोट, बीएस शिवन्ना को 30 वोट और विनय कार्तिक को 32 वोट मिले। भाजपा के रघु कौटिल्य को 29 वोट और लिंगराज पाटिल को 27 वोट मिले। वहीं जेडी(एस) उम्मीदवार गोविंदराजू को 14 वोट प्राप्त हुए।
विजयी कांग्रेस उम्मीदवार टिप्पणप्पा कामकानूर ने पार्टी नेतृत्व, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और अन्य नेताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यदि गृह मंत्री प्रियंक खड़गे का समर्थन नहीं होता तो उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिलता। उन्होंने बड़े एवं मध्यम उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल और उत्तर कर्नाटक के अन्य नेताओं के सहयोग का भी उल्लेख किया।
कांग्रेस के पांचवें उम्मीदवार विनय कार्तिक को 32 वोट मिले, जो पार्टी द्वारा पहले घोषित चार उम्मीदवारों से भी अधिक थे। पहले चार उम्मीदवारों की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कार्तिक का नाम प्रस्तावित किया था। कार्तिक को उनका करीबी सहयोगी और दूर का रिश्तेदार माना जाता है।
अतिरिक्त वोटों में भाजपा से निष्कासित विधायक शिवराम हेब्बार और एसटी सोमशेखर के अलावा भाजपा के तीन अन्य विधायक और जेडी(एस) के छह विधायक भी कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने वाले बताए जा रहे हैं।
इसी वजह से भाजपा उम्मीदवार लिंगराज पाटिल शुरुआती दौर में जीत के लिए जरूरी आंकड़े तक नहीं पहुंच सके। जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 27.63 वोटों की आवश्यकता थी, लेकिन उन्हें पहले चरण में केवल 27 वोट मिले।
हालांकि जेडी-एस उम्मीदवार गोविंदराजू को केवल 14 वोट मिले, जिसके बाद वोटों के स्थानांतरण (ट्रांसफर) के जरिए एलिमिनेशन राउंड में लिंगराज पाटिल जीत का आंकड़ा पार करने में सफल रहे।
चुनाव में कुल 222 वोट डाले गए थे, जिनमें से एक वोट अमान्य घोषित कर दिया गया। यह मत इसलिए खारिज किया गया क्योंकि मतदाता ने वरीयता संख्या सही तरीके से अंकित नहीं की थी।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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