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कौन हैं गिरिजा अम्मा, जिनके संकल्प से सैनिकों के लिए जुटे 40 लाख रुपए, पीएम मोदी ने 'मन की बात' में किया जिक्र


नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तमिलनाडु के नागरकोइल की एक शिक्षिका गिरिजा अम्मा से हुई अपनी मुलाकात का अनुभव शेयर किया। पीएम मोदी ने गिरिजा अम्मा की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है।

नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तमिलनाडु के नागरकोइल की एक शिक्षिका गिरिजा अम्मा से हुई अपनी मुलाकात का अनुभव शेयर किया। पीएम मोदी ने गिरिजा अम्मा की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "पिछले महीने मुझे एक बहुत अच्छा अनुभव हुआ। इसका संबंध 'मन की बात' से भी जुड़ा है। इसलिए आज मैं इसकी चर्चा आपसे करना चाहता हूं। तमिलनाडु के नागरकोइल में मेरी मुलाकात एक टीचर से हुई। करीब तीन दशक पहले भी मैं उनसे मिला था। मैं बात कर रहा हूं, गिरिजा अम्मा की। इस मुलाकात के दौरान कुछ युवा छात्र भी उनके साथ थे।"

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गिरिजा अम्मा करीब 15 स्कूल चलाती हैं। इनमें चेन्नई का जयगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय बहुत प्रमुख है। उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है। उन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने अपने सभी स्कूलों के छात्रों को प्रेरित किया।

पीएम मोदी ने बताया, "गिरिजा अम्मा ने बच्चों से कहा कि वे वीर जवानों के लिए हर दिन एक रुपया योगदान दें। यानी एक साल में हर छात्र की ओर से 365 रुपए जमा हुए। इस छोटे-छोटे योगदान से करीब 40 लाख रुपए इकट्ठा हुए। गिरिजा अम्मा ने इस पूरी राशि का चेक मुझे सौंपा। उनसे बातचीत के दौरान मैंने महसूस किया कि मां भारती के प्रति उनका समर्पण कितना गहरा है।"

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष ही चेन्नई के पहले हिंदू विद्यालय ने अपने 50 वर्ष पूरे किए हैं। देश की शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने में इस स्कूल नेटवर्क की भूमिका बहुत प्रशंसनीय है। मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं और उन छात्रों की भी विशेष सराहना करता हूं, जिन्होंने अपने वीर सैनिकों के लिए योगदान दिया।

--आईएएनएस

डीसीएच/

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