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केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में अधिक लोगों तक पहुंचे पेंशन सुधारों के लाभ : डॉ. जितेंद्र सिंह


नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के पूर्ववर्ती राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पिछले 12 वर्षों के सुशासन और पेंशन सुधारों का लाभ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के एक बड़े वर्ग तक पहुंचा है।

नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के पूर्ववर्ती राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पिछले 12 वर्षों के सुशासन और पेंशन सुधारों का लाभ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के एक बड़े वर्ग तक पहुंचा है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, डॉ. सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद क्षेत्र में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की संख्या बढ़ी, जिसके कारण शुरुआती दौर में कार्यभार और सेवा उपलब्ध कराने से जुड़ी कुछ चुनौतियां सामने आई थीं।

उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से इन चुनौतियों का धीरे-धीरे समाधान किया गया है।

इस कार्यक्रम के दौरान पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग और जम्मू-कश्मीर बैंक ने संयुक्त रूप से एक नई पहल शुरू की, जिसका उद्देश्य पेंशन संबंधी सेवाओं का विस्तार करना और केंद्र शासित प्रदेश के पेंशनभोगियों के लिए इन सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है।

सिंह ने कहा कि यह साझेदारी सेवा वितरण व्यवस्था को और मजबूत करेगी तथा जम्मू-कश्मीर के अधिक पेंशनभोगियों को चल रहे पेंशन सुधारों का लाभ आसानी से प्राप्त करने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में हुए सुधारों के कारण पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग अब केवल पेंशन प्रक्रिया पूरी करने वाली संस्था नहीं, बल्कि वास्तव में पेंशनभोगियों के कल्याण के लिए समर्पित संस्था के रूप में देखा जा रहा है।

मंत्री ने 'भविष्य' प्लेटफॉर्म को पेंशन प्रशासन में एक बड़ा सुधार लाने का श्रेय दिया, जिसने पेंशन प्रक्रिया के संपूर्ण डिजिटलीकरण को संभव बनाया है। अब पेंशन भुगतान आदेश डिजिलॉकर से जुड़े हुए हैं, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन दस्तावेजों तक बिना कागज के, पारदर्शी और आसान पहुंच मिल रही है।

फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के माध्यम से डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट की सुविधा शुरू होने के बाद पेंशनभोगी अपने मोबाइल फोन से घर बैठे जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं।

डॉ. सिंह ने बताया कि नवंबर 2025 में चलाए गए देशव्यापी डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अभियान में रिकॉर्ड भागीदारी देखने को मिली। इस दौरान पूरे देश में 1.91 करोड़ से अधिक डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनाए गए, जिनमें से 1.16 करोड़ से अधिक प्रमाण पत्र फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के माध्यम से जारी किए गए।

सरकार ने शिकायत निवारण व्यवस्था को भी मजबूत किया है। इसके लिए सीपीईएनजीआरएएमएस, विषय-आधारित समीक्षा तंत्र और राष्ट्रीय पेंशन अदालतों जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, जिससे पेंशन संबंधी शिकायतों का तेजी से समाधान संभव हुआ है।

उन्होंने कहा कि पारिवारिक पेंशन, अतिरिक्त पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ और लापता कर्मचारियों से जुड़े मामलों में किए गए सुधारों ने पेंशनभोगियों और उनके परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया है।

--आईएएनएस

डीबीपी

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