कोच्चि, 28 जुलाई (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को 'कुंभ मेला वायरल स्टार' के नाम से मशहूर एक महिला मोनालिसा की सुरक्षा को लेकर दखल दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ या अदालत की अनुमति के बिना कोच्चि शहर की सीमा से बाहर न ले जाया जाए।
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कोच्चि, 28 जुलाई (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को 'कुंभ मेला वायरल स्टार' के नाम से मशहूर एक महिला मोनालिसा की सुरक्षा को लेकर दखल दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ या अदालत की अनुमति के बिना कोच्चि शहर की सीमा से बाहर न ले जाया जाए।
जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने पुलिस सुरक्षा की मांग वाली महिला की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया।
अदालत के आदेश के अनुसार, हाईकोर्ट की अनुमति के बिना केरल पुलिस महिला को मध्य प्रदेश पुलिस के हवाले नहीं कर सकती। यह निर्देश उस समय जारी किया गया, जब अदालत को बताया गया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने केरल के पुलिस महानिदेशक से कानून की तय प्रक्रिया का पालन करते हुए महिला को मध्य प्रदेश पुलिस के हवाले करने को कहा था।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने एक सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर कार्रवाई की। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मोहम्मद फरमान से शादी के समय महिला नाबालिग थी।
आयोग ने यह भी कहा था कि उसके निर्देशों को लागू करने से पहले हाईकोर्ट से जरूरी अनुमति या उचित आदेश ले लिया जाए।
याचिकाकर्ता की आशंकाओं को देखते हुए अदालत ने कहा कि महिला फिलहाल उसकी सुरक्षा में है। इसलिए, अदालत की अनुमति के बिना उसे किसी के भी हवाले नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा, "राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि रिट याचिका पर अंतिम फैसला आने तक महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ कोच्चि शहर की सीमा से बाहर न ले जाया जाए।"
मोनालिसा के वकील ने अदालत से कहा कि अगर महिला को मध्य प्रदेश वापस भेजा गया, तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। वकील ने यह भी दलील दी कि शादी के समय महिला की उम्र 18 साल और तीन महीने थी।
उसने दावा किया कि बाद में उसकी जानकारी के बिना उसका मूल जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर दिया गया था। उस रद्द किए जाने के फैसले को पहले ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को दी गई पुलिस सुरक्षा को भी जारी रखने का आदेश दिया।
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अगर वह छिपकर रहती है तो उन्हें सुरक्षा देना मुश्किल होगा।
जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने मौखिक रूप से कहा कि पुलिस महिला की सुरक्षा तभी कर सकती है, जब उसे पता हो कि वह कहां मौजूद है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब भी महिला को कोई तत्काल खतरा महसूस हो तो वह अपने मामले के लिए नियुक्त महिला सुरक्षा अधिकारी से संपर्क कर सकती है। अधिकारी तुरंत उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
महिला को पहली बार जून में हाईकोर्ट से पुलिस सुरक्षा मिली थी। पुलिस के यह कहने के बाद कि वे महिला का पता नहीं लगा पा रहे हैं, उसे दी गई अंतरिम सुरक्षा कुछ समय के लिए हटा दी गई थी।
पिछले हफ्ते जब महिला सुरक्षा की मांग को लेकर दोबारा पुलिस के पास पहुंची तो कोर्ट ने उसकी सुरक्षा फिर से बहाल कर दी। इस मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी।
--आईएएनएस
एसएचके/वीसी
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