Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

केरल के स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन का सीपीआई(एम) की पूर्व महिला मंत्रियों पर पलटवार, कहा- नहीं दूंगा इस्तीफा


तिरुवनंतपुरम, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने शुक्रवार को सीपीआई(एम) की तीन पूर्व महिला स्वास्थ्य मंत्रियों की आलोचनाओं का जवाब देते हुए उनके कार्यकाल पर सवाल उठाए और साफ कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच उनका इस्तीफा देने का कोई इरादा नहीं है।

तिरुवनंतपुरम, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने शुक्रवार को सीपीआई(एम) की तीन पूर्व महिला स्वास्थ्य मंत्रियों की आलोचनाओं का जवाब देते हुए उनके कार्यकाल पर सवाल उठाए और साफ कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच उनका इस्तीफा देने का कोई इरादा नहीं है।

मुरलीधरन ने पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब वह समय बीत चुका है जब ऑपरेशन के दौरान मरीजों के शरीर में कथित रूप से सर्जिकल कैंची छूट जाती थी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुरलीधरन ने तीनों पूर्व महिला मंत्रियों पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी ही पार्टी द्वारा उपेक्षित की गई ये तीनों नेता अब उनके खिलाफ एकजुट हो गई हैं।

उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी ने मुझे मंत्री बनाया है", और स्पष्ट किया कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे।

मुरलीधरन की यह प्रतिक्रिया एक दिन बाद आई, जब सीपीआई(एम) की वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री पीके श्रीमती, केके शैलजा और वीणा जॉर्ज ने संयुक्त रूप से राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रबंधन को लेकर मौजूदा सरकार की आलोचना की थी।

मुरलीधरन ने आरोप लगाया कि एक पूर्व मंत्री के कार्यकाल में संक्रमण के कारण बच्चों की मौत हुई थी, जबकि दूसरी मंत्री के कार्यकाल में निपाह वायरस प्रकोप के दौरान लोगों की जान गई थी। उन्होंने तीसरी पूर्व मंत्री पर अपने साथ मारपीट होने का झूठा दावा करने का भी आरोप लगाया।

राज्य में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित बच्चों की दवाओं को लेकर विवाद इस राजनीतिक टकराव का मुख्य कारण बन गया है।

पूर्व मंत्रियों ने 'केवल क्लीनिकल ट्रायल के लिए' लिखी गई दवाओं के वितरण पर सवाल उठाते हुए मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।

पीके श्रीमती ने आरोप लगाया कि सरकार की गैर-जिम्मेदाराना नीति के कारण मरीजों को जीवनरक्षक दवाएं पाने में कठिनाई हो रही है।

उन्होंने दावा किया कि एलडीएफ सरकार के कार्यकाल में दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाती थीं और दस वर्षों के शासन में दवाओं की कमी की शिकायत नहीं मिली थी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के माध्यम से की जाने वाली स्थापित खरीद प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया, जिससे भ्रष्टाचार और वितरण संबंधी समस्याएं पैदा हुईं।

मुरलीधरन ने कहा कि सरकार एसएमए मरीजों के लिए आयातित दवा खरीदने के बजाय भारत में निर्मित दवा का उपयोग जारी रखेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ टीवी चैनलों की रिपोर्टों ने इस विवाद को बढ़ावा दिया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कभी-कभी विदेशी दवा कंपनियां भी ऐसी खबरों के पीछे हो सकती हैं।

इस बीच, प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन और केरल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बी. इकबाल ने स्वास्थ्य विभाग के फैसले का समर्थन किया है।

उन्होंने नैटको द्वारा निर्मित कम कीमत वाली जेनेरिक दवा रिसडिप्लाम के इस्तेमाल को इलाज को अधिक किफायती बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

दवा खरीद, मरीजों की सुरक्षा और पिछली एलडीएफ सरकार के स्वास्थ्य क्षेत्र के रिकॉर्ड को लेकर यह विवाद अब बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है। हालांकि मुख्यमंत्री नहीं बल्कि स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे के. मुरलीधरन ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

Date & Time : 2026-10-23 22:10:03

Share:

Leave A Reviews

Related News