तिरुवनंतपुरम, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन ने सोमवार को मांग की कि पिछली एलडीएफ सरकार के दौरान केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) के माध्यम से की गई सभी नियुक्तियों की व्यापक जांच कराई जाए और इन नियुक्तियों की समीक्षा की जाए।
![]()
तिरुवनंतपुरम, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन ने सोमवार को मांग की कि पिछली एलडीएफ सरकार के दौरान केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) के माध्यम से की गई सभी नियुक्तियों की व्यापक जांच कराई जाए और इन नियुक्तियों की समीक्षा की जाए।
उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब कथित अनियमितताओं के सिलसिले में पूछताछ के लिए दो पीएससी सदस्य विशेष जांच दल (एसआईटी) के सामने पेश हुए। वहीं, पीएससी अध्यक्ष डॉ. एम. आर. बैजू को भी बुधवार को एसआईटी के सामने पेश होने के लिए नोटिस भेजा गया है।
मुरलीधरन ने वी.डी. सतीशन सरकार पर आरोप लगाया कि वह कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचा रही है।
रविवार को यह खबर सामने आई कि राज्यपाल ने भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर पीएससी बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल की इस कार्रवाई का सीपीआई (एम) द्वारा विरोध करना तो समझ में आता है, लेकिन सवाल यह है कि कांग्रेस और यूडीएफ इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
मुख्यमंत्री सतीशन ने सोमवार को विधानसभा को बताया था कि राज्य पुलिस प्रमुख को पीएससी में अनियमितताओं से जुड़ी 180 शिकायतें मिली हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग के माध्यम से प्राप्त तीन शिकायतों को क्राइम ब्रांच से जांच कराने के लिए गृह विभाग को भेज दिया गया है।
मुरलीधरन ने कहा कि इतनी सारी शिकायतें सामने आने के बाद, सरकार को इन आरोपों की जांच करनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। इन शिकायतों के आधार पर राज्यपाल ने 21 अगस्त को पीएससी सचिव से स्पष्टीकरण मांगा था।
इसके बाद ही राष्ट्रपति को सिफारिश भेजी गई। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने आरोप लगाया कि राज्यपाल की यह कार्रवाई असंवैधानिक है।
उन्होंने कहा कि उन्हें अपने इन आरोपों का आधार स्पष्ट करना चाहिए।
मुरलीधरन ने अदालत की हालिया टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें अदालत ने सत्ता पक्ष और विपक्ष की आलोचना की थी। अदालत ने कहा था कि जब अनियमितताओं में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी, तब ये दोनों पक्ष एक-दूसरे को बचा रहे थे।
उन्होंने कहा कि अदालत की टिप्पणियों के बावजूद सरकार का अपना रुख न बदलना, जनता को चुनौती देने जैसा है।
उन्होंने मांग की कि सरकार एलडीएफ के कार्यकाल के दौरान पीएससी में की गई सभी नियुक्तियों की समीक्षा करे, मुख्य आरोपियों से पूछताछ करे, और जो लोग दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई करे।
मुरलीधरन ने कहा कि पीएससी में जनता का भरोसा फिर से बहाल करने के लिए ऐसे कदम उठाना बहुत जरूरी है।
--आईएएनएस
एससीएच/एबीएम
Leave A Reviews