तिरुवनंतपुरम, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल लोक भवन ने उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के आधिकारिक आवास पर मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी। लोक भवन ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध केवल राज्यपाल के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोई पर लागू था, जो कि पूर्णतः शाकाहारी हैं।
![]()
तिरुवनंतपुरम, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल लोक भवन ने उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के आधिकारिक आवास पर मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी। लोक भवन ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध केवल राज्यपाल के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोई पर लागू था, जो कि पूर्णतः शाकाहारी हैं।
अधिकारियों ने बताया कि लोक भवन के कर्मचारियों या अन्य लोगों के भोजन विकल्पों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। वे अपनी पसंद का भोजन लाने और खाने के लिए स्वतंत्र हैं।
यह स्पष्टीकरण उन खबरों के बाद उठे राजनीतिक विवाद के बीच आया है, जिनमें कहा गया था कि माथुर ने राज्यपाल आवास पर मांसाहारी भोजन न पकाने और न परोसने का निर्देश दिया है।
इन खबरों की सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी सीपीआई-एम दोनों ने कड़ी आलोचना की थी। दोनों दलों के नेताओं ने राज्यपाल पर संघ परिवार के एजेंडे को लागू करने का आरोप लगाया।
एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा था कि यह फैसला हद से ज्यादा आगे बढ़ गया है। उन्होंने तर्क दिया कि राज्यपाल अपनी निजी खानपान की पसंद दूसरों पर नहीं थोप सकते।
वेणुगोपाल ने कहा कि केरल में विविध खानपान की संस्कृति है और लोगों को अपनी पसंद का भोजन करने की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि मलयाली लोगों की पारंपरिक खानपान की आदतों पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
उन्होंने आगे कहा कि संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को दूसरों पर अपनी खानपान संबंधी पसंद थोपने का अधिकार नहीं है। वेणुगोपाल ने यह भी आरोप लगाया कि यह कदम संघ परिवार के सांप्रदायिक एजेंडे का हिस्सा है और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला है।
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने भी लोगों के खानपान संबंधी विकल्पों को निर्देशित करने के प्रयासों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि क्या खाना है, क्या पहनना है और कौन सी भाषा बोलनी है, यह तय करने की स्वतंत्रता व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है।
सीपीआई-एम के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने संघ परिवार पर भोजन को सांप्रदायिक मुद्दा बनाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया था। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में हर किसी को अपनी खानपान की आदतें चुनने का अधिकार है।
यह विवाद माथुर के केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद शुरू हुआ।
--आईएएनएस
एएसएच/वीसी
Leave A Reviews