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खड़गे को रबर स्टांप की तरह इस्तेमाल कर रही कांग्रेस, दलितों के लिए प्यार दिखावटी: भाजपा


नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। भाजपा ने सोमवार को समाज के वंचित वर्गों को बढ़ावा देने के मामले में कांग्रेस के दोहरे रवैये पर निशाना साधा। भाजपा ने आरोप लगाया कि यह सामंती पार्टी अपने अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का इस्तेमाल सिर्फ एक रबर स्टांप और दलित सशक्तीकरण के प्रतीक के तौर पर कर रही है।

नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। भाजपा ने सोमवार को समाज के वंचित वर्गों को बढ़ावा देने के मामले में कांग्रेस के दोहरे रवैये पर निशाना साधा। भाजपा ने आरोप लगाया कि यह सामंती पार्टी अपने अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का इस्तेमाल सिर्फ एक रबर स्टांप और दलित सशक्तीकरण के प्रतीक के तौर पर कर रही है।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि खड़गे का आज का बयान सिर्फ राजनीतिक तौर पर शर्मनाक ही नहीं था, बल्कि यह कांग्रेस पार्टी की सामंती संस्कृति की बिना किसी रोक-टोक की झलक थी।

एक्स पोस्ट पर मालवीय ने कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन अपनी पार्टी के अंदर दलित नेताओं को सिर्फ दिखावे के लिए, ढाल बनाकर या चुनावी चेहरा बनाकर इस्तेमाल करती है। उन्हें कभी असली सत्ता नहीं दी जाती।

भाजपा के राष्ट्रीय सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी मालवीय ने कहा कि यूपीए शासनकाल में दलित चेहरों को सिर्फ नाम के लिए आगे बढ़ाया गया, जबकि सारी अहम राजनीतिक और सांगठनिक सत्ता गांधी परिवार के आस-पास के लोगों के हाथों में ही सिमटी रही।

मालवीय ने कहा कि जब नतीजा पहले से तय होता है, तो दलित नेताओं को आगे कर दिया जाता है, लेकिन जब असली फैसले लेने और सत्ता संभालने की बात आती है, तो गांधी परिवार ही सब कुछ अपने हाथ में ले लेता है।

भाजपा नेता ने कहा कि आज मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस बात का सारा शक दूर कर दिया कि वह कांग्रेस के सिर्फ एक रबर स्टांप अध्यक्ष हैं, उन्होंने खुलेआम ऐलान कर दिया कि कर्नाटक कांग्रेस के अंदरूनी झगड़े का फैसला राहुल गांधी ही करेंगे।

उन्होंने कहा कि जरा सोचिए कि इस बयान में कितनी बड़ी बेइज्जती छिपी हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष, जो खुद एक दलित नेता हैं, उन्होंने खुलेआम मान लिया कि असली सत्ता तो कहीं और है, गांधी परिवार के हाथों में है।

उन्होंने कहा कि लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। कांग्रेस का इतिहास रहा है कि वह दलितों को सिर्फ अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करती है, जबकि उन्हें असली सत्ता और अधिकार देने से कतराती है। जब पार्टी को किसी ऐसी लड़ाई के लिए बलि का बकरा चाहिए होता है, जिसमें हार पक्की हो, तो उसे अचानक 'सामाजिक न्याय' की याद आ जाती है।

मालवीय ने कहा कि इसके उदाहरण हर जगह हैं। सुशील कुमार शिंदे को ऐसी चुनावी स्थितियों में मैदान में उतारा गया, जहां जीत नामुमकिन थी और जब सत्ता का समीकरण तय हो गया, तो उन्हें किनारे कर दिया गया। 2017 में मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया, जबकि कांग्रेस को पहले से पता था कि वह यह चुनाव आसानी से हार जाएगी। कर्नाटक में ही, खड़गे के इतने बड़े कद और दशकों के अनुभव के बावजूद, कांग्रेस आलाकमान ने असली सत्ता के लिए बार-बार गांधी परिवार के वफादारों को ही चुना।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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