नई दिल्ली, 10 मई (आईएएनएस)। गर्भावस्था के दौरान महिला का खान-पान न सिर्फ उसकी अपनी सेहत बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत और विकास के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट आम लोगों के साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी अपने भोजन की थाली में सभी रंग यानी पोषक तत्वों को शामिल करने की सलाह देते हैं, जिसे आमतौर पर 'सतरंगी थाली' भी कहा जाता है।
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नई दिल्ली, 10 मई (आईएएनएस)। गर्भावस्था के दौरान महिला का खान-पान न सिर्फ उसकी अपनी सेहत बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत और विकास के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट आम लोगों के साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी अपने भोजन की थाली में सभी रंग यानी पोषक तत्वों को शामिल करने की सलाह देते हैं, जिसे आमतौर पर 'सतरंगी थाली' भी कहा जाता है।
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) सतरंगी थाली के महत्व को बताते हुए सवाल पूछता है कि क्या आपकी थाली में सभी रंग शामिल हैं? अगर नहीं, तो यह चिंता की बात हो सकती है। सतरंगी थाली यानी थाली में अलग-अलग रंगों के फल, सब्जियां, अनाज और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल करना संतुलित पोषण का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है। एक रंग का भोजन शरीर को एक तरह के पोषक तत्व देता है, जबकि सात रंगों वाली थाली शरीर की हर जरूरत को पूरा करती है। यह सिर्फ दिखने में आकर्षक नहीं होती, बल्कि स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद भी है।
गर्भवती महिलाओं के लिए सतरंगी थाली विशेष रूप से जरूरी मानी जाती है। इस दौरान महिला के शरीर को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है क्योंकि एक नया और खास समय चल रहा होता है। ऐसे में संतुलित और रंग-बिरंगी थाली मां और शिशु दोनों को जरूरी विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स, फाइबर और प्रोटीन उपलब्ध कराती है। इससे गर्भ में बच्चे का विकास सही तरीके से होता है, मां की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है और प्रसव के बाद रिकवरी भी तेज होती है।
हर रंग का अपना महत्व होता है जैसे हरा रंग यानी पालक, ब्रोकली या अन्य सब्जियां, जो आयरन और फोलिक एसिड से भरपूर होता है। लाल रंग यानी टमाटर, गाजर आदि जो विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपर होती है। पीला-नारंगी रंग यानी केला, संतरा हैं, जो विटामिन सी और पोटैशियम से भरपूर होता है। वहीं, बैंगनी रंग जैसे जामुन, बैंगन एंटीऑक्सीडेंट्स जो सूजन कम करते हैं
एनएचएम का कहना है कि स्वस्थ भविष्य की शुरुआत सही पोषण से होती है। सतरंगी थाली कोई फैशन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। गर्भवती महिलाएं अगर रोज अपनी थाली में अलग-अलग रंगों के मौसमी फल और सब्जियां शामिल करेंगी तो पोषण की कमी नहीं होगी। डाइटिशियन भी सलाह देते हैं कि गर्भावस्था में एक ही तरह का भोजन न खाएं। रंगों का विविधता न सिर्फ पोषण बढ़ाता है बल्कि भूख भी अच्छी लगती है और खाने का मजा भी बढ़ जाता है।
--आईएएनएस
एमटी/पीएम
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