नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत में क्यूबा के राजदूत जुआन कार्लोस मार्सन ने कहा कि भारत और क्यूबा के राजनीतिक संबंध बेहद मजबूत हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंध अभी भी उनकी वास्तविक क्षमता से काफी पीछे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश जैव प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
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नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत में क्यूबा के राजदूत जुआन कार्लोस मार्सन ने कहा कि भारत और क्यूबा के राजनीतिक संबंध बेहद मजबूत हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंध अभी भी उनकी वास्तविक क्षमता से काफी पीछे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश जैव प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में मार्सन ने कहा कि भारतीय और क्यूबा की कंपनियों के बीच जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 20 वर्ष से अधिक समय से सहयोग जारी है। उन्होंने बताया कि क्यूबा भारतीय कंपनियों को कैंसर, तंत्रिका संबंधी रोगों, मधुमेह और हेपेटाइटिस-बी जैसी बीमारियों के उपचार से जुड़े अभिनव जैव-प्रौद्योगिकी उत्पादों के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के नए अवसर प्रदान कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह सहयोग केवल क्यूबा के लिए ही नहीं, बल्कि भारत और वैश्विक बाजार के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है। राजदूत ने बताया कि भारत क्यूबा में दवा निर्माण के लिए आवश्यक सक्रिय औषधि सामग्री (एपीआई) और कच्चे माल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को और विस्तार दिया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि अब भारतीय कंपनियों के लिए क्यूबा में 100 प्रतिशत स्वामित्व वाली कंपनियां स्थापित करने और निजी फार्मेसी खोलने की संभावनाएं भी उपलब्ध हैं, जिससे निवेश और व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में 27 और 28 अक्टूबर को क्यूबा पर अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय प्रतिबंधों के खिलाफ प्रस्ताव पर होने वाले मतदान को लेकर मार्सन ने आशा जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का बड़ा हिस्सा क्यूबा का समर्थन करेगा। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव अमेरिकी सरकार को स्पष्ट संदेश देगा कि क्यूबा के खिलाफ जारी यह नीति अन्यायपूर्ण है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए।
राजदूत ने कहा कि क्यूबा ने हमेशा दुनिया के देशों के साथ सहयोग और एकजुटता को बढ़ावा दिया है। उन्होंने बताया कि क्यूबा ने 100 से अधिक देशों में 3 लाख से ज्यादा डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को सेवा के लिए भेजा है। साथ ही 100 से अधिक देशों के 45 हजार से ज्यादा छात्र क्यूबा में शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि हवाना स्थित इंटरनेशनल स्कूल ऑफ मेडिसिन से भी दुनिया भर के 25 हजार से अधिक छात्र स्नातक हो चुके हैं। मार्सन ने कहा कि क्यूबा आगामी 27 और 28 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 34वीं बार अमेरिका की नाकाबंदी के खिलाफ प्रस्ताव पेश करेगा।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के अधिकांश देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है क्योंकि वे समझते हैं कि प्रतिबंधों का सबसे अधिक असर आम क्यूबाई नागरिकों पर पड़ता है।
राजदूत ने भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारत लगातार क्यूबा के प्रस्तावों का समर्थन करता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने बयानों में स्पष्ट किया है कि क्यूबा को शांति और सम्मान के साथ रहने का अधिकार है तथा मतभेदों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।
भारत द्वारा यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए बातचीत पूरी किए जाने के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर क्यूबा के राजदूत ने कहा कि उनका देश भारत के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए किसी भी प्रकार के संवाद और संस्थागत ढांचे पर चर्चा करने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि क्यूबा भारत के साथ आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत शुरू करने में रुचि रखता है और इस दिशा में सकारात्मक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
मार्सन ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल सकती है।
--आईएएनएस
केके/एमएस
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