
भोपाल: "अगर सरकार से यह मदद न मिलती, तो गरीबी के आगे मेरे घुटने टिक जाते और मेरी पढ़ाई हमेशा के लिए बंद हो जाती। आज मैं कॉलेज जा रही हूँ, तो सिर्फ इसलिए क्योंकि मेरे सिर पर 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' का हाथ है।" यह भावुक कर देने वाले शब्द मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले की रहने वाली प्रतिभा बुरेडिया के हैं। यह महज एक बेटी की जुबानी नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी और संवेदनशील 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' की सफलता की वह जीवंत कहानी है, जो आज प्रदेश की लाखों बेटियों की जिंदगी में शिक्षा और आत्मनिर्भरता की रोशनी बिखेर रही है। आर्थिक तंगहाली और मजबूरियों के अंधेरे को चीरकर अपनी किस्मत खुद लिखने वाली दो बेटियों प्रतिभा बुरेडिया और ओशीन खान की दास्तान आज राष्ट्रीय पटल पर उन सभी परिवारों के लिए एक बड़ी मिसाल बनकर उभरी है, जो अक्सर तंगहाली के कारण अपनी बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छुड़वा देते हैं।
अशोकनगर के वार्ड क्रमांक 21 की रहने वाली प्रतिभा के पिता राजेंद्र रजक पेशे से मजदूर हैं। गरीबी रेखा के नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले इस परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने के साथ-साथ बच्चों को पढ़ाना किसी बड़े पहाड़ को पार करने जैसा था। प्रतिभा बताती हैं कि जब वह कक्षा 12वीं में थीं, तो घर की माली हालत देखकर उन्हें गहरा डर था कि उनकी पढ़ाई का सफर यहीं थम जाएगा। ठीक ऐसी ही कहानी वार्ड क्रमांक 18 की ओशीन खान की भी है। एक मध्यमवर्गीय मजदूर परिवार से आने वाली ओशीन के पिता अमजद खान पर भी पूरे परिवार की जिम्मेदारी और बच्चों की शिक्षा का भारी बोझ था। लेकिन, इन दोनों ही बेटियों के ऊंचे सपनों के आड़े गरीबी की दीवार खड़ी नहीं हो सकी, क्योंकि बचपन में ही सजग आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से उनका पंजीयन 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' के तहत हो चुका था।

इस दूरदर्शी योजना के माध्यम से इन बेटियों को स्कूल से लेकर कॉलेज की दहलीज तक हर मोड़ पर मजबूत आर्थिक सुरक्षा की गारंटी मिली। प्रतिभा को उनके शैक्षणिक सफर के दौरान कक्षा 6वीं में ₹2,000 की राशि, कक्षा 9वीं में ₹4,000, कक्षा 11वीं में ₹6,000 और फिर कक्षा 12वीं (वर्ष 2025) में ₹6,000 की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। इस निरंतर वित्तीय सहायता के दम पर दोनों बेटियों ने साल 2025 में न सिर्फ अपनी 12वीं की परीक्षा शानदार अंकों के साथ उत्तीर्ण की, बल्कि कॉलेज की दहलीज पर भी सम्मान के साथ कदम रख दिया। वर्तमान में प्रतिभा को कॉलेज के प्रथम वर्ष के लिए ₹12,500 की पहली किश्त मिल चुकी है, वहीं ओशीन को स्नातक स्तर (Graduation) की पढ़ाई के लिए दो किश्तों में कुल ₹25,000 की बड़ी सहायता राशि मिल रही है।
मध्यप्रदेश सरकार की यह योजना केवल एक सरकारी आर्थिक मदद नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति रूढ़िवादी सोच को बदलने का एक बड़ा आंदोलन बन चुकी है। योजना के अंतर्गत पात्र बालिकाओं को उनके जन्म से लेकर 21 वर्ष की आयु पूरा होने तक कुल 1,43,000 रूपये की वित्तीय सहायता राशि चरणबद्ध तरीके से प्रदान की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में बेटियों के जन्म को एक उत्सव के रूप में प्रोत्साहित करना, बालिकाओं की शिक्षा को बिना किसी बाधा के उच्च स्तर तक ले जाना और बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर पूरी तरह रोक लगाना है; क्योंकि योजना का अंतिम लाभ केवल उन्हीं बेटियों को मिलता है जिनकी शादी 18 वर्ष से कम उम्र में न हुई हो। आज हाथ में कॉलेज की किताबें लेकर आगे बढ़ रहीं ये बेटियाँ मुख्यमंत्री के प्रति अपना आभार जताते हुए कहती हैं कि इस योजना ने बेटियों को बोझ समझने वाली सोच को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है।
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