Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

मध्य प्रदेश : महाकाल मंदिर की पार्किंग वाली जमीन होटल बनाने के लिए बेचने का आरोप


भोपाल/उज्जैन, 19 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास एक जमीन सौदे को लेकर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद एक विवाद खड़ा हो गया है। सिंघार ने दावा किया है कि पार्किंग के लिए इस्तेमाल की जा रही सरकारी जमीन को एक ऐसी कंपनी को बेच दिया गया, जिसका संबंध भाजपा के एक विधायक से है।

भोपाल/उज्जैन, 19 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास एक जमीन सौदे को लेकर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद एक विवाद खड़ा हो गया है। सिंघार ने दावा किया है कि पार्किंग के लिए इस्तेमाल की जा रही सरकारी जमीन को एक ऐसी कंपनी को बेच दिया गया, जिसका संबंध भाजपा के एक विधायक से है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिस जमीन को मूल रूप से सरकारी संपत्ति के तौर पर तय किया गया था, उसे पहले प्राइवेट बनाया गया और फिर यूटोपिया होटल एंड रिजॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया गया। इस कंपनी के डायरेक्टरों में आलोट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय भी शामिल हैं।

सिंघार ने सवाल उठाया कि क्या महाकाल लोक प्रोजेक्ट, जिसे एक धार्मिक और सांस्कृतिक विकास के तौर पर पेश किया गया था, अब सिर्फ एक ऐसा जरिया बनकर रह गया है, जिससे रियल एस्टेट सौदों को बढ़ावा मिले और भाजपा नेताओं तथा मध्य प्रदेश में सत्ताधारी भाजपा सरकार के करीबियों को फायदा हो?

मंगलवार को जारी एक बयान में सिंघार ने कहा, "क्या 'महाकाल लोक' खुद, आपकी सरकार की देखरेख में, अब भाजपा नेताओं और आपके साथियों से जुड़े प्रॉपर्टी सौदों के लिए महज एक जरिया बनकर रह गया है?"

यह मामला लगभग 45,000 वर्ग फीट जमीन के एक टुकड़े से जुड़ा है।

सिंघार के बयान के मुताबिक, 2 मार्च 2026 को यूटोपिया होटल एंड रिजॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने यह जमीन 3.82 करोड़ रुपए में खरीदी थी।

कांग्रेस के दावे के अनुसार, कंपनी के डायरेक्टर विधायक चिंतामणि मालवीय और उनके बिजनेस पार्टनर इकबाल सिंह हैं।

शिकायतकर्ता राजेंद्र कुवाल, जो उज्जैन के रहने वाले हैं, ने मुख्य सचिव, लोकायुक्त और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई हैं।

हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में एक जनहित याचिका (पीआईएल) भी दायर की गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 1950 और 1967-68 के राजस्व रिकॉर्ड से पता चलता है कि अधिग्रहित जमीन के कुछ हिस्से आधिकारिक तौर पर सरकारी संपत्ति के तौर पर दर्ज थे। करोड़ों रुपए की जमीन को गलत तरीके से कृषि भूमि बताकर रजिस्टर कराया गया, जिसके चलते लगभग 3.40 करोड़ रुपए की स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की चोरी की गई।

सिंघार ने कहा, "पहले महाकाल लोक प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। अब, महाकाल की ही जमीन पर कब्जे और उसके कमर्शियल सौदों को लेकर आरोप लग रहे हैं। भाजपा सरकार ने धर्म को आस्था का विषय मानने के बजाय महज एक बिजनेस का जरिया बना दिया है।"

हालांकि, विधायक मालवीय ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये आरोप 'झूठे और दुर्भावनापूर्ण' हैं।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

Share:

Leave A Reviews

Related News