नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मद्रास हाईकोर्ट में 19 वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को जज नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
![]()
नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मद्रास हाईकोर्ट में 19 वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को जज नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि 18 मई को हुई बैठक में 4 नवंबर 2025 के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसमें छह न्यायिक अधिकारियों को मद्रास हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी।
इनमें डॉ. पी. मुरुगन, एम.डी. सुमति, एस. अल्ली, सी. थिरुमगल चंद्रशेखर, धर्मलिंगम लिंगेश्वरन और कार्तिकेयन बालाथंडायुथम शामिल हैं।
बयान में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 मई को हुई बैठक में मद्रास हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
इसके अलावा कॉलेजियम ने 21 नवंबर 2025 के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी, जिसमें छह वकील, नटराजन रमेश, जी.के. मुथुकुमार, रामकृष्णन राजेश विवेकानंथन, शंकरनारायणन रवीकुमार, नागराजन दिलीप कुमार और एलप्पन मनोहरन को मद्रास हाईकोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की गई थी।
7 दिसंबर 2025 के एक अन्य प्रस्ताव में, कॉलेजियम ने वकील कृष्णास्वामी गोविंदराजन, रजनीश पथियिल, के. अप्पादुरई उर्फ कंदावेल अप्पादुरई और रामासामी अनीता के नामों को मद्रास हाई कोर्ट की बेंच में जज के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दी।
कॉलेजियम ने 10 दिसंबर 2025 के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी, जिसमें न्यायिक अधिकारियों शन्मुगम कार्तिकेयन, बालूचामी मुरुगेशन और एन. गुणशेखरन को मद्रास हाई कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश करते हैं और इसमें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जज शामिल होते हैं।
हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति से जुड़े नियमों के अनुसार, संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अपने दो वरिष्ठतम जजों से सलाह लेकर नामों का प्रस्ताव भेजते हैं।
इसके बाद यह सिफारिश मुख्यमंत्री को भेजी जाती है, जो इसे राज्यपाल के पास भेजते हैं। फिर राज्यपाल इस प्रस्ताव को जरूरी दस्तावेजों और जानकारी के साथ केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री को भेजते हैं।
इसके बाद केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर प्रक्रिया पूरी करती है और इसे भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा जाता है। मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जजों से सलाह लेकर अंतिम सिफारिश तय करते हैं।
कॉलेजियम की मंजूरी के बाद सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी जाती है।
राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर करने और न्याय विभाग द्वारा राजपत्र में अधिसूचना जारी करने के बाद नियुक्तियां प्रभावी हो जाती हैं।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
Leave A Reviews