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महाराष्ट्र के दौंड में झोलाछाप डॉक्टर गिरफ्तार, 6.5 लाख रुपए की नकदी और दवाइयां जब्त


मुंबई, 28 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के दौंड से मेडिकल धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक नकली डॉक्टर, जो गैर-कानूनी तरीके से डॉक्टरी कर रहा था, उसको गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने गुरुवार को मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उसके पास से दवाएं, इंजेक्शन और 6.54 लाख रुपए की नकदी जब्त की गई है।

मुंबई, 28 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के दौंड से मेडिकल धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक नकली डॉक्टर, जो गैर-कानूनी तरीके से डॉक्टरी कर रहा था, उसको गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने गुरुवार को मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उसके पास से दवाएं, इंजेक्शन और 6.54 लाख रुपए की नकदी जब्त की गई है।

आरोपी की पहचान ओमप्रकाश बंसीलाल स्वर्णकार के रूप में हुई है, जिसने यवत के कसुरडी गांव के अखादेवस्ती इलाके में बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री, महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण और दवाएं बेचने के लाइसेंस के बिना एक अवैध क्लिनिक शुरू किया था।

पुलिस ने बताया कि आरोपी राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की हुरड़ा तहसील के सदर बाजार का रहने वाला है।

पुलिस कर्मियों द्वारा क्लिनिक पर छापा मारे जाने के बाद इस अवैध धंधे का भंडाफोड़ हुआ। छापे के दौरान, मौके से विभिन्न कंपनियों की एलोपैथिक दवाएं, इंजेक्शन, सिरिंज, संदिग्ध बिना लेबल वाली बोतलों में भरे तरल पदार्थ और नकदी बरामद की गई।

जब्त की गई चीजों में सिप्ला, इंटास और लीफोर्ड कंपनियों की दवाएं, 381 संदिग्ध बोतलें, सिरिंज और 85,100 रुपए नकद शामिल हैं। पुलिस ने क्लिनिक के बाहर खड़ी एक होंडा सिटी कार को भी जब्त कर लिया, जिसमें दवाओं का अतिरिक्त स्टॉक मिला।

दौंड के खामगांव इलाके में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. आशीष शंकर शिरासे द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर, आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 319(2) और मेडिकल प्रैक्टिस एक्ट, 1961 की धारा 33(1) और 33(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी अवैध रूप से डॉक्टरी कर लोगों को गुमराह करने के साथ मरीजों की जान को खतरे में डाल रहा था। यवत पुलिस द्वारा आगे की जांच की जा रही है।

इससे पहले, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित 'संजीवनी क्लिनिक' में कार्यरत 3 डॉक्टरों को मध्य प्रदेश के दमोह में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

पुलिस के अनुसार, 16 मई को कोतवाली पुलिस स्टेशन को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय से एक जांच रिपोर्ट मिली थी।

रिपोर्ट में कहा गया था कि ग्वालियर के रहने वाले कुमार सचिन यादव और सीहोर के रहने वाले राजपाल गौर ने दमोह की सुभाष कॉलोनी में स्थित संजीवनी क्लिनिक में नियुक्ति पाने के लिए जाली और मनगढ़ंत एमबीबीएस डिग्रियां, मेडिकल काउंसिल पंजीकरण प्रमाण पत्र और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज जमा किए थे।

--आईएएनएस

डीके/डीएससी

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