
उज्जैन/काशी. इस वर्ष महाशिवरात्रि का महापर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा. शिव पुराण के अनुसार, यह वह पावन तिथि है जब फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा और पालनकर्ता विष्णु के सामने पहली बार 'ज्योतिर्लिंग' प्रकट हुआ था. शाम 6:20 बजे से शुरू होने वाले चार प्रहर की विशेष पूजा के साथ भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी कर सकेंगे.
पूजा विधि और व्रत के कड़े नियम
महाशिवरात्रि का व्रत आत्म-शुद्धि का पर्व है. उज्जैन के विद्वानों के अनुसार:
स्नान: सूर्योदय से पूर्व उठकर पानी में गंगाजल और काले तिल डालकर स्नान करें.
संकल्प: हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें और दिनभर विवाद, झूठ और निद्रा से बचें.
भोजन: व्रत में अन्न वर्जित है. यदि संभव हो तो निर्जला रहें, अन्यथा फल और दूध का सेवन कर सकते हैं.
रुद्राभिषेक: शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) के साथ बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें.
शिवरात्रि से जुड़ी 3 बड़ी कथाएं
लिंगोद्भव की कथा: ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता के विवाद को सुलझाने के लिए भगवान शिव अनंत प्रकाश वाले स्तंभ (लिंग) के रूप में प्रकट हुए. जिसका अंत खोजने में दोनों असमर्थ रहे.
शिव-शक्ति मिलन: यद्यपि शिव पुराण अगहन मास में विवाह की बात कहता है, लेकिन परंपराओं में इसे शिव-शक्ति के मिलन की रात माना जाता है क्योंकि शिवलिंग के आधार में माता पार्वती का वास होता है.
समुद्र मंथन (कालकूट विष): पौराणिक मान्यता है कि इसी रात शिव ने विषपान कर सृष्टि की रक्षा की थी, जिसके बाद देवताओं ने उनका अभिषेक किया.
पूजन सामग्री चेकलिस्ट
| सामग्री | महत्व |
| पंचामृत | शुद्धिकरण और अभिषेक के लिए |
| बेलपत्र | तीन गुणों (सत्व, रज, तम) के समर्पण के लिए |
| काले तिल | नकारात्मकता दूर करने के लिए |
| धतूरा/आक | शिव के वैराग्य रूप की प्रिय वस्तु |
| गंगाजल | पवित्रता के लिए |
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