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मालवीय नगर आग हादसा: साकेत कोर्ट ने कुक केसर नेगी को दी जमानत, कहा-गवाहों को प्रभावित करने का नहीं मिला आधार


नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में आग लगने के मामले में गिरफ्तार कुक केसर नेगी को साकेत कोर्ट ने नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने जमानत आदेश में कहा कि उसके सामने ऐसा कोई विशेष तथ्य पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि केसर नेगी ने किसी गवाह को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने का प्रयास किया हो।

नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में आग लगने के मामले में गिरफ्तार कुक केसर नेगी को साकेत कोर्ट ने नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने जमानत आदेश में कहा कि उसके सामने ऐसा कोई विशेष तथ्य पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि केसर नेगी ने किसी गवाह को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने का प्रयास किया हो।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से जताई गई आशंकाएं सामान्य प्रकृति की हैं और केवल आशंका के आधार पर आरोपी को लंबे समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि उसे ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि जमानत पर रिहाई से जांच प्रभावित होगी।

अदालत ने जमानत देते समय कुछ शर्तें भी लगाई हैं। आदेश के अनुसार, केसर नेगी को जब भी जांच अधिकारी जांच में शामिल होने के लिए बुलाएंगे, उन्हें उपस्थित होकर जांच में सहयोग करना होगा। इसके अलावा, वह अभियोजन पक्ष के सबूतों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेंगे और न ही किसी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास करेंगे।

केसर नेगी ने नियमित जमानत के लिए आवेदन किया था। यह एफआईआर मालवीय नगर पुलिस स्टेशन में 3 जून 2026 को फ्लोरिश स्टे होटल में लगी आग की घटना के संबंध में दर्ज की गई थी। नेगी 6 जून 2026 से न्यायिक हिरासत में थे।

जमानत याचिका में केसर नेगी की ओर से दलील दी गई थी कि उन्हें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने बताया कि वह होटल में केवल वेतन पाने वाले शेफ के रूप में काम करते थे और उनका होटल के संचालन, प्रबंधन या निगरानी व्यवस्था में कोई मालिकाना अधिकार या जिम्मेदारी नहीं थी।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि एफआईआर और गिरफ्तारी मेमो में ऐसे आवश्यक तथ्य दर्ज नहीं हैं, जिनसे उन पर लगाए गए आरोपों के सभी कानूनी तत्व पूरे होते हों। बचाव पक्ष ने कहा कि किसी भी दस्तावेज में नेगी की ओर से कोई विशेष लापरवाही, चूक या ऐसा कार्य नहीं बताया गया है, जिससे आग की घटना को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से उनसे जोड़ा जा सके।

बचाव पक्ष का कहना था कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मजबूत मामला नहीं बनता है, क्योंकि आग लगने की घटना में उनकी भूमिका को लेकर कोई प्रत्यक्ष या ठोस आरोप सामने नहीं आया है।

साकेत कोर्ट ने सभी तथ्यों और जांच की स्थिति को देखते हुए केसर नेगी को सशर्त जमानत प्रदान कर दी।

--आईएएनएस

एससीएच/वीसी

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