नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और पूर्व सीएम ममता बनर्जी के बीच चल रही खींचतान के बीच 2021 की एक तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर पर कई मीम्स बने हैं, जिनमें खेला होबे के नारे वाली एक तस्वीर भी शामिल है।
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नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और पूर्व सीएम ममता बनर्जी के बीच चल रही खींचतान के बीच 2021 की एक तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर पर कई मीम्स बने हैं, जिनमें खेला होबे के नारे वाली एक तस्वीर भी शामिल है।
यह घटना मार्च 2021 की है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान अपने बाएं पैर में चोट लगवा बैठी थीं। इसके बाद उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर और पैर पर प्लास्टर बंधवाकर चुनाव प्रचार किया। यह दृश्य उस चुनाव की सबसे चर्चित तस्वीरों में से एक बन गया।
उस समय भी इस प्रचार अभियान को लेकर तीखी राजनीतिक बहस छिड़ी थी, उनके समर्थकों ने इसे किसी राजनीतिक नेता पर हुए खतरनाक हमले के सबूत के तौर पर पेश किया जबकि आलोचकों ने इस कहानी पर सवाल उठाए।
आलोचकों का कहना था कि यह चोट एक खंभे से टकराकर वापस आए खुले दरवाजे के लगने से लगी थी। इसके बावजूद, व्हीलचेयर से प्रचार करने की उनकी छवि राजनीतिक रूप से बहुत असरदार साबित हुई और बंगाल की चुनावी लोक-कथाओं का हिस्सा बन गई।
पांच साल बाद, यह बहस राजनीतिक ड्रामे से आगे बढ़कर मेडिकल एथिक्स और सच छिपाने के मुद्दे पर आ गई है।
इस मामले की जांच की जरूरत बताते हुए सीएम सुवेंदु ने अब सार्वजनिक रूप से ममता के 2021 के इलाज से जुड़े मेडिकल दस्तावेजों का जिक्र किया है और आरोप लगाया है कि रिकॉर्ड में फ्रैक्चर या हड्डी खिसकने कोई सबूत नहीं मिला।
इसके जवाब में ममता ने अस्पताल और उनके इलाज से जुड़े अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा है और यह जानना चाहा है कि कथित तौर पर गोपनीय मेडिकल रिकॉर्ड सार्वजनिक कैसे हो गए। नोटिस में यह सवाल उठाया गया कि किस कानूनी अधिकार के तहत ऐसे रिकॉर्ड्स का खुलासा किया गया और क्या किसी कोर्ट के आदेश या कानूनी प्रक्रिया ने उन्हें जारी करने की इजाजत दी थी।
हालांकि यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या वाकई फ्रैक्चर हुआ था लेकिन इसने इस बात पर भी बहस छेड़ दी है कि क्या किसी मरीज के मेडिकल रिकॉर्ड्स, खासकर किसी मशहूर हस्ती के उनकी मंजूरी के बिना सार्वजनिक रूप से उन पर चर्चा की जा सकती है।
हालांकि उनके आलोचकों का आरोप है कि मरीज की प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा की दलील के पीछे मामले को दबाने की कोशिश हो सकती है लेकिन ममता खेमे का तर्क है कि रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक करने को सही नहीं ठहराया जा सकता।
इस बहस ने उस अस्पताल को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है, जहां 2021 में व्हीलचेयर पर बाहर लाए जाने से पहले ममता का इलाज हुआ था। जहां उस समय अस्पताल की भूमिका एक घायल मरीज का इलाज करने की थी, वहीं अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या उसने उसी मरीज से जुड़ी संवेदनशील मेडिकल जानकारी की ठीक से सुरक्षा की थी।
--आईएएनएस
डीकेएम/पीएम
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