नासिक, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में 'शबरी नेचुरल' का जिक्र किया। यह ब्रांड पारंपरिक आदिवासी उत्पादों, जैसे शहद, हस्तशिल्प और बांस की वस्तुओं को बढ़ावा देता है। इससे महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद मिली है, जिसमें एक जापानी वैश्विक डिजाइन पुरस्कार भी शामिल है।
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नासिक, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में 'शबरी नेचुरल' का जिक्र किया। यह ब्रांड पारंपरिक आदिवासी उत्पादों, जैसे शहद, हस्तशिल्प और बांस की वस्तुओं को बढ़ावा देता है। इससे महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद मिली है, जिसमें एक जापानी वैश्विक डिजाइन पुरस्कार भी शामिल है।
आईएएनएस से बातचीत में 'शबरी नेचुरल' के मार्केटिंग हेड दीवान सोनवणे ने कहा कि 'शबरी नेचुरल' ब्रांड की स्थापना महाराष्ट्र के जनजातीय विकास विभाग के अंतर्गत 'शबरी ट्राइबल फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन' के माध्यम से की गई थी, ताकि जनजातीय समुदायों की आय बढ़ाई जा सके और उनकी संस्कृति का सम्मान किया जा सके। 'शबरी नेचुरल' ब्रांड की ओर से, मैं पीएम मोदी का आभार जताना चाहता हूं कि उन्होंने अपने कार्यक्रम में हमारे उत्पादों का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी ने 'शबरी नेचुरल' ब्रांड का उल्लेख किया। उन्होंने जनजातीय समुदायों, कारीगरों और शिल्पकारों के बारे में बात की। यह बहुत सम्मान की बात है कि महाराष्ट्र के जनजातीय समुदायों की कला और संस्कृति को पहचान मिली है। हमारे यह उत्पाद महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों से यहां पर आते हैं, जिसे 'शबरी नेचुरल' इन उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने का प्रयास कर रहा है। हमें खुशी हो रही है कि 'शबरी नेचुरल' ब्रांड को डिजाइन अवॉर्ड मिला है, हमें बहुत खुशी हो रही है कि इसे आगे जापान का प्रतिष्ठित ग्लोबल डिजाइन अवॉर्ड भी मिल चुका है।
सोनवणे ने बताया कि इस ब्रांड के अंतर्गत खाद्य पदार्थों, वन आधारित उत्पादों, प्राकृतिक शहद, महुआ से बने उत्पादों, हस्तशिल्प, बांस से निर्मित सजावटी वस्तुओं और पारंपरिक आभूषणों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है। इन उत्पादों की विशेषता यह है कि इन्हें महाराष्ट्र के विभिन्न आदिवासी समुदाय अपनी पारंपरिक जानकारी और स्थानीय संसाधनों के आधार पर तैयार करते हैं। शबरी नेचुरल के अंतर्गत भंडारा जिले से गोंड समुदाय द्वारा तैयार किया जाने वाला महुआ मधु एवं महुआ सिरप उपलब्ध है। धुले जिले में कोकणा और भील समुदायों द्वारा महुआ ऑयल तथा महुआ चॉकलेट तैयार की जाती हैं।
उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त नासिक क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े बोहाडा मुखौटे तथा गढ़चिरौली जिले के भामरागढ़ क्षेत्र में माडिया गोंड समुदाय द्वारा तैयार किए जाने वाले डोकरा शिल्प भी इस ब्रांड के माध्यम से लोगों तक पहुंचाए जा रहे हैं। ये हस्तनिर्मित वस्तुएं आदिवासी समुदायों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला को प्रदर्शित करती हैं।
--आईएएनएस
डीकेएम/वीसी
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