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मानसून सत्र से पहले एमवीए ने ठुकराया फडणवीस की चाय पार्टी का न्योता, कहा- जनता परेशान और सरकार असंवेदनशील


मुंबई, 21 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र से एक दिन पहले विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (एमवीए) ने रविवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा आयोजित पारंपरिक हाई-टी मीटिंग का बहिष्कार करने की घोषणा की।

मुंबई, 21 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र से एक दिन पहले विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (एमवीए) ने रविवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा आयोजित पारंपरिक हाई-टी मीटिंग का बहिष्कार करने की घोषणा की।

तीन सप्ताह का मॉनसून सेशन सोमवार से शुरू होगा और 10 जुलाई को खत्म होगा।

मुख्यमंत्री को लिखे एक लेटर में जयंत पाटिल, जितेंद्र आव्हाड, भास्कर जाधव, सतेज पाटिल, अनिल परब, अंबादास दानवे और अमीन पटेल जैसे सीनियर एमवीए नेताओं ने राज्य में फैली गंभीर मुश्किलों को दूर करने में नाकाम रहने के लिए महायुति सरकार की आलोचना की।

विपक्ष ने कहा कि जब जनता गंभीर परेशानी का सामना कर रही है, तब एक फॉर्मल चाय पार्टी में हिस्सा लेना जनता के गुस्से की पूरी तरह से अनदेखी होगी। आज दोपहर मीटिंग के बाद उन्होंने आम चाय का बॉयकॉट करने का एकमत से फैसला लिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयंत पाटिल, भास्कर जाधव और सतेज पाटिल ने सरकार की निष्क्रियता और असंवेदनशीलता को दिखाते हुए 13 मुख्य मुद्दे उठाए।

एमवीए नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बॉयकॉट का उनका मुख्य कारण यह है कि विधानसभा और विधान परिषद, दोनों में विपक्ष के नेता (एलओपी) के पद खाली हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह इन जरूरी वॉचडॉग पदों को खाली छोड़कर और इसके बजाय एमएलए को अलग-अलग चाय पार्टी के न्योते भेजकर डेमोक्रेटिक और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर कर रही है।

नेताओं ने कहा कि देर से हुई बारिश से भयंकर सूखा पड़ गया है। राज्य के डैम में पानी का स्टोरेज लेवल गिरकर सिर्फ 23.54 परसेंट रह गया है, जिससे बुआई का काम पूरी तरह रुक गया है।

विपक्ष ने 36,585 करोड़ रुपए की पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर किसान स्वतंत्रता योजना को वास्तविक राहत के बजाय शर्तों और नियमों का जाल करार दिया। विपक्ष ने मांग की कि किसानों के 7/12 भूमि अभिलेख (सातबारा) बिना किसी शर्त के ऋणमुक्त और साफ किए जाएं।

दावा किया जा रहा है कि किसानों को बहुत कम दाम मिल रहे हैं। एमवीए ने खरीद में एक बड़े घोटाले का भी आरोप लगाया। यह देखते हुए कि 11 अयोग्य कोऑपरेटिव सोसायटियों को गैर-कानूनी तरीके से एनएएफईडी खरीद कॉन्ट्रैक्ट दिए गए थे। आम और काजू उगाने वाले किसानों को हर हेक्टेयर 22,000 रुपए का मुआवजा बहुत कम माना गया, जिससे इस इलाके में पहली बार किसानों ने आत्महत्या की।

इसके अलावा, मुंबई-गोवा हाईवे 17 साल बाद भी अधूरा है फिर भी खारपाड़ा पर टोल वसूली जारी है। एमवीए ने फ्लैगशिप लाडकी बहिन स्कीम में भारी गड़बड़ियों का आरोप लगाया।

उन्होंने बताया कि 2.47 करोड़ बेनिफिशियरी में से हैरान करने वाली बात यह है कि 81 लाख लोग अयोग्य पाए गए, जिससे पता चलता है कि लगभग 24,300 करोड़ रुपए का गलत बंटवारा हुआ। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 14,000 पुरुष सिर्फ महिलाओं के लिए बने पोर्टल पर कैसे रजिस्टर कर पाए।

कानून व्यवस्था का जिक्र करते हुए एमवीए ने कहा कि 2026 के पहले चार महीनों में 3,279 पॉक्सो मामले दर्ज किए गए। बताए गए आंकड़ों में हर 53 मिनट में एक नाबालिग पर हमला और रोजाना 24 नाबालिगों के साथ रेप शामिल हैं।

उन्होंने युवाओं में ड्रग्स की लत पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हाल ही में पुणे की एक रेव पार्टी और मुंबई के एक म्यूजिक कॉन्सर्ट में ड्रग्स के ओवरडोज का जिक्र किया। साथ ही नागपुर का मर्डर केस में देश भर में दूसरे नंबर पर होना भी बताया।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए एमवीए ने दावा किया कि कॉन्ट्रैक्टर्स को अब सरकारी प्रोजेक्ट्स हासिल करने के लिए 44 परसेंट कमीशन की मांग का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही अपने बिल पास करवाने के लिए 5 परसेंट एक्स्ट्रा देना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मराठी कॉन्ट्रैक्टर्स के पेंडिंग बिल लगभग एक लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गए हैं।

एमवीए ने कहा कि सरकार का दावा है कि उसने 1.38 करोड़ पौधे लगाए हैं, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि महाराष्ट्र में ठाणे, आरे और बड़े कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स के आस-पास पेड़ों की बेतहाशा कटाई की वजह से 23,000 हेक्टेयर पेड़ खत्म हो गए हैं।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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