
मंडला जिले के नैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत पाला सुंदर के बरगांव में शनिवार को दिल दहला देने वाला नजारा दिखा। यहां ग्रामीणों को धान के भूसे (पेरा) के ढेर में एक नवजात बच्ची ढकी हुई मिली। बच्ची की सिसकियाँ सुनकर स्थानीय लोग वहां पहुंचे और तुरंत पुलिस को सूचना दी। मासूम की नाजुक हालत को देख अनिल झरिया, शेख अकिल और ग्राम कोटवार ने एम्बुलेंस का इंतजार नहीं किया। उन्होंने मानवता दिखाते हुए बच्ची को अपनी मोटरसाइकिल से ही अस्पताल की ओर रवाना कर दिया।
रास्ते में एम्बुलेंस मिलने पर बच्ची को उसमें स्थानांतरित कर सिविल अस्पताल नैनपुर पहुंचाया गया। अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जेपी चिचाम ने बताया कि बच्ची को अत्यंत गंभीर अवस्था में लाया गया था। उसकी पल्स और ब्लड प्रेशर काफी कम था। डॉक्टरों की टीम ने करीब आधे घंटे तक उसे आपातकालीन उपचार दिया। प्राथमिक जांच में सामने आया कि बच्ची का जन्म समय से पहले (Pre-mature) हुआ था। खुले में पड़े रहने के कारण वह हाइपोथर्मिया का शिकार हो गई थी।
डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद मासूम को बचाया नहीं जा सका। शरीर में शुगर और तापमान की भारी कमी के कारण इलाज के दौरान ही बच्ची की मौत हो गई। इस खबर से अस्पताल में मौजूद ग्रामीणों और स्वास्थ्य कर्मियों की आंखें नम हो गईं। यह स्पष्ट था कि बच्ची को जन्म के तुरंत बाद ही वहां फेंक दिया गया था। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि आखिर वह कौन सी मजबूर या निर्दयी मां थी, जिसने अपनी संतान को इस तरह मरने के लिए छोड़ दिया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए नैनपुर थाना प्रभारी बलदेव मुजाल्दा और नायब तहसीलदार संदीप मौके पर पहुंचे। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है ताकि मौत के सटीक कारणों और समय का पता चल सके। पुलिस आसपास के गांवों के स्वास्थ्य केंद्रों और आशा कार्यकर्ताओं से गर्भवती महिलाओं का रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि बच्ची के माता-पिता का सुराग लगाया जा सके।
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