Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

'मोबाइल मोड' से निकलकर 'एक्शन मोड' में आए युवा, राष्ट्र निर्माण में निभाएं भूमिका: स्वांतरंजन


लखनऊ, 26 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांतरंजन ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को केवल मोबाइल तक सीमित रहने के बजाय सक्रिय होकर राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके बाहरी आवरण से नहीं, बल्कि उसके मानवीय मूल्यों और आचरण से होती है। उन्होंने स्वयंसेवकों से पढ़ने, लिखने और समाज में सकारात्मक विचारों के प्रसार का आह्वान किया।

लखनऊ, 26 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांतरंजन ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को केवल मोबाइल तक सीमित रहने के बजाय सक्रिय होकर राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके बाहरी आवरण से नहीं, बल्कि उसके मानवीय मूल्यों और आचरण से होती है। उन्होंने स्वयंसेवकों से पढ़ने, लिखने और समाज में सकारात्मक विचारों के प्रसार का आह्वान किया।

राजधानी लखनऊ स्थित विश्व संवाद केंद्र में रविवार को 'मातृभूमि स्तवन' पुस्तक का लोकार्पण स्वांतरंजन के हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जब राष्ट्र और सनातन का विचार एक साथ अभिव्यक्त होता है, तब उसका महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि पुस्तकों का अध्ययन करने के साथ-साथ उनके विचारों को समाज तक पहुंचाना भी उतना ही आवश्यक है। यह पुस्तक व्यक्ति को बताती है कि उसे किसी बाहरी आवरण की नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों को आत्मसात करने की आवश्यकता है।

स्वांतरंजन ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि अब समय 'मोबाइल मोड' से निकलकर 'एक्शन मोड' में आने का है। स्वांतरंजन ने पुस्तक के लेखक को समर्पित स्वयंसेवक बताते हुए कहा कि संघ में शाखा के दौरान हमेशा यह आग्रह किया जाता है कि स्वयंसेवक अपने अनुभवों को नियमित रूप से डायरी में दर्ज करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य अच्छे व्यक्तियों का निर्माण और उनके व्यक्तित्व का गुणात्मक विकास करना है। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों द्वारा स्थापित अनेक संगठन आज विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं, लेकिन किसी स्वयंसेवक की वास्तविक पहचान उसके व्यवहार और जीवन में संघ के विचारों के व्यावहारिक रूप में दिखाई देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने प्रचारकों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई कि वे किसी विशेष वेशभूषा में नहीं, बल्कि सामान्य समाज का हिस्सा बनकर राष्ट्र कार्य करें। स्वयंसेवक को समाज से केवल एक कदम आगे रहना चाहिए, अलग दिखाई देना आवश्यक नहीं है। उन्होंने 'मातृभूमि स्तवन' को ऐतिहासिक महत्व का ग्रंथ बताते हुए कहा कि इसमें संघ के पुराने गीत, सुभाषित, मंत्र और अन्य प्रेरक सामग्री संकलित है, जो स्वयंसेवकों के भीतर संस्कारों का संचार करती है। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों से अपील की कि वे जहां भी जाएं, अच्छी बातों को अपनी डायरी में लिखें, उनका अध्ययन करें और उन्हें समाज तक पहुंचाएं।

आरएसएस के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए स्वांतरंजन ने कहा कि यह समय संघ के विचारों को व्यापक समाज तक पहुंचाने का है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों द्वारा भारत के विरुद्ध नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है। ऐसे समय में नई पीढ़ी का दायित्व है कि वह भारत को गहराई से समझे और वैश्विक मंच पर देश का पक्ष प्रभावी ढंग से रखे।

कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर के निदेशक डॉ. सर्व नारायण झा ने कहा कि यह ग्रंथ मां सरस्वती की आराधना के समान है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में मातृभूमि के प्रति समर्पण और श्रद्धा का भाव है तथा यह स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक का कार्य करेगी।

वरिष्ठ वक्ता एके श्रीवास्तव ने पुस्तक के लेखक को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन सात्विकता, आध्यात्मिक आस्था और अनुशासन का उदाहरण था।

वहीं, पुस्तक का परिचय देते हुए डॉ. चन्द्रभूषण त्रिपाठी ने कहा कि यह केवल पुस्तक नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। उन्होंने बताया कि इसमें मंत्र, सुभाषित, केशव अर्चना, ध्वजगीत और शाखा में खेले जाने वाले खेलों सहित संघ की वैचारिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संजोया गया है। उन्होंने प्रत्येक स्वयंसेवक से इस ग्रंथ का अध्ययन करने का आग्रह किया।

--आईएएनएस

विकेटी/डीकेपी

Share:

Leave A Reviews

Related News