
नई दिल्ली. संसद का मानसून सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल (Sine Die) के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र के अंतिम दिन भारी हंगामे और संक्षिप्त औपचारिकताओं के बीच लोकसभा की कार्यवाही महज 1 मिनट तक चली, जबकि राज्यसभा लगभग 1 घंटे तक ही चल सकी।
अंतिम दिन लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सदन में मौजूद रहे। राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के गायन के तुरंत बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की।
राज्यसभा में अंतिम दिन करीब 1 घंटे चली कार्यवाही के दौरान खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक यानी MMDR Amendment Bill को पास कर दिया गया।
सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी (उत्तराखंड) में अपने एक कार्यक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर कराए गए कथित 'शुद्धिकरण' का मुद्दा जोर-शोर से उठाया और विरोध दर्ज कराया।
संसदीय कामकाज और समय के उपयोग के लिहाज से यह सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। आंकड़ों के मुताबिक:
सत्र की अवधि: इस मानसून सत्र के दौरान लोकसभा की कुल 19 बैठकें हुईं।
समय की हानि: सामान्य तौर पर प्रतिदिन 6 घंटे के हिसाब से 19 बैठकों में कुल 114 घंटे कार्यवाही होनी तय थी। हालांकि, विभिन्न मुद्दों पर हुए गतिरोध के कारण सदन सिर्फ 17 घंटे 30 मिनट ही चल सका।
कामकाज का नुकसान: कुल निर्धारित समय में से लगभग 96 घंटे 30 मिनट का समय बिना किसी कामकाज के बर्बाद हो गया।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष (2025) 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चले मानसून सत्र में भी 21 बैठकों के दौरान लोकसभा में महज 37 घंटे ही काम हो सका था।
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