
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित हुई कैबिनेट बैठक में मध्य प्रदेश के विकास, शिक्षा, किसान कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई ऐतिहासिक प्रस्तावों पर मुहर लगा दी गई है। इस बैठक में राज्य सरकार ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए कुल 5 हजार 960 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रावधानों को हरी झंडी दिखाई है। एमपी कैबिनेट के फैसले राज्य में शिक्षा के स्तर को सुधारने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में बड़े गेम चेंजर साबित होंगे।
कैबिनेट बैठक में सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बेहद संवेदनशील और बड़ा निर्णय लिया गया। सरकार ने 'मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना' और 'कल्याणी विवाह सहायता योजना' को 1 अप्रैल 2026 से अगले पांच वर्षों (2026-27 से 2030-31) तक निरंतर जारी रखने के लिए 1 हजार 740 करोड़ 57 लाख रुपये के बजट को मंजूरी दी है।
इस योजना के अंतर्गत गरीब, जरूरतमंद, निराक्षित और निर्धन परिवारों की विवाह योग्य बेटियों, विधवाओं और परित्यक्ताओं को सामूहिक विवाह के पावन अवसर पर 55 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे दी जाती है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक राज्य के 1 लाख 72 हजार 905 हितग्राहियों को 989 करोड़ 80 लाख 62 हजार रुपये से अधिक की मदद पहुंचाई जा चुकी है।
स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत एमपी कैबिनेट के फैसले बेहद क्रांतिकारी हैं। सरकार ने राज्य के शासकीय माध्यमिक विद्यालयों को हाई स्कूल में और हाई स्कूलों को हायर सेकेंडरी स्कूलों में उन्नत (अपग्रेड) करने की योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इस पूरी योजना पर सरकार 635 करोड़ 24 लाख रुपये खर्च करने जा रही है:
सत्र 2026-27: 75 माध्यमिक विद्यालयों को हाई स्कूल और 100 हाई स्कूलों को हायर सेकेंडरी स्कूल बनाया जाएगा।
आगामी वर्ष (2027-28 और 2028-29): हर साल इसी अनुपात में (75 माध्यमिक और 100 हाई स्कूल) विद्यालयों का उन्नयन किया जाएगा।
मध्य प्रदेश में वर्तमान में हाई स्कूल स्तर पर सकल नामांकन दर (GER) 75 प्रतिशत और हायर सेकेंडरी स्तर पर महज 55 प्रतिशत है। कक्षा 8वीं से 9वीं में जाने वाले छात्रों की दर 77% और 10वीं से 11वीं में जाने की दर सिर्फ 68% है। दूरी अधिक होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे, विशेषकर लड़कियां, पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं (ड्रॉप आउट)। सरकार का लक्ष्य है कि साल 2029 तक राज्य में 100% सकल नामांकन दर हासिल की जाए, जिसके लिए गांवों के नजदीक स्कूल उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
अन्नदाताओं के हित में भी एमपी कैबिनेट के फैसले में एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई है। वर्ष 2026-27 के लिए किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पकालीन फसल ऋण देने की योजना में नई शर्तों को स्वीकृति दी गई है।
अब खरीफ और रबी फसलों के लिए अलग-अलग देय तिथियां तय करने के बजाय 'वार्षिक एकल ऋण सीमा' लागू की जाएगी। किसानों को पहली बार ऋण निकालने की तारीख से पूरे 12 महीने (1 वर्ष) तक लोन चुकाने की शानदार सुविधा मिलेगी। इसके तहत किसानों को 1.25 प्रतिशत सामान्य ब्याज अनुदान और समय पर कर्ज चुकाने (प्रामाणिक किसानों) को 4 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज अनुदान दिया जाएगा। बता दें कि प्रदेश में यह योजना साल 2012-13 से चल रही है, जिसमें 3 लाख रुपये तक के अल्पकालीन कर्ज पर कोई ब्याज नहीं लिया जाता।
शाजापुर जिले के शुजालपुर क्षेत्र के युवाओं के लिए कैबिनेट ने सत्र 2026-27 से नए शासकीय विधि महाविद्यालय (गवर्नमेंट लॉ कॉलेज) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इसके सुचारू संचालन के लिए 17 नए पदों के सृजन और 2 करोड़ 39 लाख 92 हजार रुपये के बजट को भी पास किया गया है।
लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के सुचारू संचालन, अनाज परिवहन और राशन दुकानों के कमीशन व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए 3 हजार 580 करोड़ 7 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 'पीएम जनमन' और 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' के तहत आदिवासी क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने के लिए केंद्रांश पर लगने वाली SGST राशि राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी और इसे अंश पूंजी के रूप में बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को देगी।
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