
इंदौर/सांवेर. इंदौर-बुधनी नई रेलवे लाइन परियोजना की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है. डकाच्या और सांवेर क्षेत्र से गुजरने वाली इस लाइन के निर्माण में बाधक बन रहे 35 प्रजातियों के 277 पेड़ों को काटने की अनुमति दे दी गई है.
यह मंजूरी रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के आवेदन पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा दी गई है. हालांकि, प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस अनुमति के साथ बेहद कड़ी शर्तें भी जोड़ी हैं.
ट्रांसप्लांट पहली प्राथमिकता, कटाई आखिरी विकल्प प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पेड़ों को सीधे काटने के बजाय पहले उन्हें सुरक्षित रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित (ट्रांसप्लांट) करने की कोशिश की जाएगी. यदि ट्रांसप्लांट संभव नहीं होता है, तभी पेड़ काटे जा सकेंगे. इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी इंदौर वनमंडल के अधिकारियों द्वारा की जाएगी.
3 गुना ज्यादा पेड़ और 5 साल तक देखभाल रेलवे को दिए गए निर्देशों के अनुसार:
जितने पेड़ काटे जाएंगे, रेलवे को उसके बदले रेल मार्ग के दोनों ओर तीन गुना अधिक नए पौधे लगाने होंगे.
लगाए जाने वाले पौधे कम से कम 3 साल पुराने होने चाहिए.
इन पौधों की 5 साल तक देखभाल सुनिश्चित करनी होगी और प्रतिवर्ष वीडियोग्राफी के जरिए इसकी रिपोर्ट वन समिति और एसडीएम कार्यालय को सौंपनी होगी.
निजी जमीन और सागौन के पेड़ों पर 'नो एंट्री' जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अनुमति केवल चिन्हित पेड़ों के लिए है. बबूल, नीम, इमली और आम जैसी 35 प्रजातियों की सूची तैयार की गई है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निजी भूमि पर लगे पेड़ों और सागौन (टीक) के पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा.
डकाच्या, लसूडिया परमार, बीसाखेड़ी और कदवाली जैसे गाँवों से होकर गुजरने वाली इस लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया मार्च 2025 से तेज कर दी गई है. वन विभाग के अनुसार, इस मार्ग में कोई वन भूमि नहीं आ रही है, इसलिए पटरियां राजस्व भूमि पर ही बिछाई जाएंगी.
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