Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

मृणाल सेन: दवाइयां बेचकर चलाते थे खर्च, खाली समय में सीखते थे सिनेमा की बारिकियां, ऐसे बने महान निर्देशक


भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्होंने फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज का आईना बना दिया। ऐसे ही महान फिल्मकारों में एक नाम मृणाल सेन का भी शामिल है। मृणाल सेन ने अपनी फिल्मों के जरिए आम आदमी की जिंदगी, समाज की परेशानियों, राजनीति, बेरोजगारी और गरीबी को बड़े पर्दे पर दिखाया। यही वजह रही कि उन्हें भारतीय समानांतर सिनेमा का मजबूत स्तंभ माना गया।

भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्होंने फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज का आईना बना दिया। ऐसे ही महान फिल्मकारों में एक नाम मृणाल सेन का भी शामिल है। मृणाल सेन ने अपनी फिल्मों के जरिए आम आदमी की जिंदगी, समाज की परेशानियों, राजनीति, बेरोजगारी और गरीबी को बड़े पर्दे पर दिखाया। यही वजह रही कि उन्हें भारतीय समानांतर सिनेमा का मजबूत स्तंभ माना गया।

बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों की दुनिया में नाम कमाने से पहले मृणाल सेन ने दवाइयों के एजेंट के तौर पर भी काम किया था। नौकरी करते हुए भी उनका मन सिनेमा और साहित्य में ही लगा रहता था। मृणाल सेन का जन्म 14 मई 1923 को अविभाजित बंगाल के फरीदपुर में हुआ था, जो अब बांग्लादेश में है। उनके पिता दिनेशचंद्र सेन पेशे से वकील थे और स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन करते थे।

मृणाल ने कोलकाता से फिजिक्स की पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में उनका झुकाव साहित्य, थिएटर और राजनीति की तरफ बढ़ने लगा। उन्हें किताबें पढ़ने का बेहद शौक था। एक दिन उनके हाथ लेखक रुडोल्फ अर्नहेम की किताब 'फिल्म ऐज आर्ट' लगी। इस किताब ने उनकी सोच बदल दी और यहीं से उनका सिनेमा की तरफ झुकाव बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने फिल्मों और सिनेमा से जुड़ी कई किताबें पढ़ीं। वह घंटों लाइब्रेरी में बैठकर सिनेमा को समझने की कोशिश करते थे।

मृणाल सेन के लिए फिल्मों में जगह बनाना आसान नहीं था। संघर्ष के दिनों में उन्होंने दवाइयों के एजेंट की नौकरी भी की। नौकरी के जरिए वह अपना खर्च चलाते थे, लेकिन उनका मन हमेशा सिनेमा में ही लगा रहता था। नौकरी के बीच भी वह फिल्में देखते, किताबें पढ़ते और सिनेमा की तकनीक समझने की कोशिश करते रहते थे। बाद में उन्होंने एक स्टूडियो में साउंड रिकॉर्डिस्ट की नौकरी की, जहां उन्हें फिल्मों को करीब से समझने का मौका मिला।

मृणाल सेन ने साल 1955 में अपनी पहली फिल्म 'रात भोरे' बनाई। हालांकि एक इंटरव्यू में उन्होंने खुद माना था कि यह फिल्म उनके लिए किसी बुरे सपने जैसी थी, क्योंकि वह अपने विचारों को सही तरीके से पर्दे पर नहीं उतार पाए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार सीखते रहे। इसके बाद उनकी फिल्म 'नील आकाशेर नीचे' आई, जिससे उन्हें पहचान मिली।

मृणाल सेन के करियर का सबसे बड़ा मोड़ साल 1969 में आया, जब उन्होंने भुवन सोम बनाई। बेहद कम बजट में बनी इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा की दिशा बदल दी। इसे हिंदी समानांतर सिनेमा की शुरुआत माना जाता है। फिल्म को देश और विदेश में खूब सराहना मिली। इसी फिल्म से अमिताभ बच्चन ने नैरेशन की दुनिया में शुरुआत की थी।

इसके बाद मृणाल सेन ने एक से बढ़कर एक फिल्में बनाईं, जिसमें 'कलकत्ता 71', 'पदातिक', 'मृगया', 'खारिज', 'खंडहर' और 'एक दिन अचानक' जैसी फिल्में शामिल हैं।

मृणाल सेन ने कई कलाकारों को नई पहचान भी दिलाई। मिथुन चक्रवर्ती को फिल्म 'मृगया' से बड़ा मौका मिला था। इसी फिल्म के लिए मिथुन को पहला नेशनल अवॉर्ड मिला। मृणाल सेन ने स्मिता पाटिल, शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी जैसे कलाकारों के साथ काम किया।

अपने लंबे करियर में मृणाल सेन को कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया। उनकी फिल्मों को कांस, बर्लिन और वेनिस जैसे अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी पुरस्कार मिले।

30 दिसंबर 2018 को मृणाल सेन का निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने की वजह से उन्होंने कोलकाता स्थित अपने घर में 95 साल की उम्र में आखिरी सांस ली।

--आईएएनएस

पीके/एएस

Share:

Leave A Reviews

Related News