कोलकाता, 29 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित नगर निकाय भर्ती अनियमितता मामले में गिरफ्तार पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री Sujit Bose को शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नियमित पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया।
![]()
कोलकाता, 29 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित नगर निकाय भर्ती अनियमितता मामले में गिरफ्तार पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री Sujit Bose को शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नियमित पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया।
हाईकोर्ट में फिलहाल ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है। ऐसे में बोस के वकील ने गुरुवार को अवकाशकालीन एकल पीठ की न्यायाधीश न्यायमूर्ति शम्पा दत्ता पॉल के समक्ष याचिका दायर की थी।
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान बोस के वकील ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल नगर निकाय भर्ती घोटाले में आरोपी नहीं थे, इसलिए इस मामले में ईडी द्वारा की गई गिरफ्तारी को चुनौती दी गई है।
हालांकि न्यायमूर्ति शम्पा दत्ता पाल ने कहा कि मामले की सुनवाई अवकाश समाप्त होने के बाद हाईकोर्ट की नियमित पीठ करेगी, इसलिए फिलहाल पूर्व मंत्री को कोई राहत नहीं दी जा सकती।
अदालत ने ईडी को सुजीत बोस की गिरफ्तारी से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही बोस के वकील को भी अपने पक्ष के तर्कों को विस्तार से बताते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है।
उत्तर 24 परगना जिले की बिधाननगर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रहे सुजीत बोस हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में हार गए थे। उन्हें 11 मई की रात करीब 10 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने गिरफ्तार किया था। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित हुए थे।
वर्तमान में बोस ईडी की हिरासत में हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने दक्षिण दमदम नगर पालिका में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए अयोग्य उम्मीदवारों की सिफारिश करने के बदले धन लिया था।
ईडी का दावा है कि बोस ने लगभग 150 अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की सिफारिश कर भारी रकम अर्जित की। गिरफ्तारी से पहले एजेंसी ने उनके आवास और कार्यालयों पर छापेमारी भी की थी।
जांच एजेंसी ने बोस और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों की जांच के दौरान कथित फर्जी वित्तीय लेन-देन का भी पता लगाया है।
ईडी ने यह भी दावा किया है कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, जब बोस के स्वामित्व वाला एक रेस्तरां पूरी तरह बंद था, तब भी उसके खाते में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ। एजेंसी के अनुसार लॉकडाउन अवधि में रेस्तरां के खाते में 1.1 करोड़ रुपये और बोस के निजी खाते में 2.2 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
ईडी ने ये जानकारियां कोलकाता स्थित धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत के समक्ष भी प्रस्तुत की हैं।
--आईएएनएस
डीएससी
Leave A Reviews