इंदौर, 4 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने युवाओं के बीच नशीले पदार्थों के बढ़ते सेवन के खिलाफ सामाजिक जागरूकता प्रयासों को तेज करने और साथ ही संगठन में बड़े स्तर पर पुनर्गठन की योजना की घोषणा की है। मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित 'अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल' (एबीकेएम) की बैठक में चर्चा के बाद आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने यह जानकारी दी।
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इंदौर, 4 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने युवाओं के बीच नशीले पदार्थों के बढ़ते सेवन के खिलाफ सामाजिक जागरूकता प्रयासों को तेज करने और साथ ही संगठन में बड़े स्तर पर पुनर्गठन की योजना की घोषणा की है। मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित 'अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल' (एबीकेएम) की बैठक में चर्चा के बाद आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने यह जानकारी दी।
आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने बताया कि संगठन ने हाल ही में 8,346 कस्बों और 5,028 समूहों में एक व्यापक संपर्क अभियान चलाया था, जिसमें 3,79,581 सामुदायिक नेताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। इस अभियान का एक मुख्य उद्देश्य सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना और हिंदू समाज के भीतर हर तरह के भेदभाव को पूरी तरह खत्म करना था।
उन्होंने बताया कि 2 से 4 नवंबर तक चली इस बैठक में सामाजिक परिवर्तन के पांच चिन्हित क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही, समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काम कर रहे व्यक्तियों और संगठनों के साथ निरंतर जुड़ाव बनाए रखने की जरूरत पर बल दिया गया।
सरकार्यवाह ने कहा कि इन पहलों से जुड़े जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान जिन मुख्य चिंताओं को रखा गया, उनमें से एक युवाओं के बीच नशीले पदार्थों के सेवन की बढ़ती समस्या थी।
इस मुद्दे को एक गंभीर सामाजिक चुनौती बताते हुए होसबोले ने कहा कि नशीले पदार्थों की लत को एक बहुत बड़े और संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर से बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों को सराहा। साथ ही होसबोले ने कहा कि इस समस्या को रोकने और जागरूकता फैलाने में समाज की भी अहम भूमिका है।
आरएसएस नेता ने बताया कि संगठन नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ जागरूकता पैदा करने, प्रभावित व्यक्तियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श देने और उनके परिवारों को सहायता प्रदान करने के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों व संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा। बैठक में इन प्रयासों के समन्वय के लिए एक व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई।
संगठनात्मक स्तर पर आरएसएस नेता ने एक बड़े पुनर्गठन अभियान की घोषणा की। वर्तमान में संघ 40 प्रांतों के माध्यम से काम करता है, लेकिन नवंबर और दिसंबर में संघचालकों के चुनाव और नई कार्यकारी समितियों के गठन के बाद, इसके ढांचे को पुनर्गठित करके 88 संभागों में बांट दिया जाएगा।
बैठक में हर संभाग की जरूरतों और परिस्थितियों के हिसाब से कार्य योजनाएं तैयार करने पर चर्चा की गई।
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल ने हिंदू सामाजिक जागरण से जुड़ी तीन प्रमुख हस्तियों को श्रद्धांजलि देते हुए प्रस्ताव भी पारित किए। बैठक में स्वामी श्रद्धानंद को उनकी शहादत की शताब्दी पर याद किया गया और स्वामी सदानंद के योगदान को भी स्मरण किया गया। इन दोनों संतों को धर्मांतरण रोकने, आदिवासी समुदायों के बीच शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने और सामाजिक व सांस्कृतिक जागरूकता को मजबूत करने के उनके प्रयासों के लिए याद किया गया।
संघ ने समाज से उन सेवा कार्यों को जारी रखने का आह्वान किया, जिनकी शुरुआत उन्होंने की थी। एक अन्य प्रस्ताव में राजनारायण बसु की 200वीं जयंती का उल्लेख किया गया, जिन्हें भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में एक अग्रणी व्यक्ति माना जाता है।
बैठक में आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत की हाल ही में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा की यात्राओं पर भी चर्चा हुई। संगठन के अनुसार, भागवत ने वहां रहने वाले भारतीयों, शिक्षाविदों और सामुदायिक नेताओं से बातचीत की और उनके सामने वैश्विक एकता व मानवता की एकात्मता का संदेश रखा।
--आईएएनएस
डीसीएच/एबीएम
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