
नेपाल की राजनीति में बुधवार को उस समय एक बड़ा भूचाल आ गया जब गृह मंत्री सूडान गुरुंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। महज एक महीने पहले भ्रष्टाचार विरोधी मंच और 'जेन-जी' (Gen-Z) आंदोलन की लहर पर सवार होकर सत्ता में आए गुरुंग ने अपने ऊपर लगे वित्तीय आरोपों के बीच 'नैतिक जिम्मेदारी' लेते हुए यह कदम उठाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उनका पद से हटना जरूरी था।
सूडान गुरुंग का इस्तीफा उन वित्तीय आरोपों के बाद आया है, जो हाल के दिनों में मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं में छाए हुए थे। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी व्यवसायी दीपक भट्ट से जुड़ी कंपनियों (जैसे स्टार माइक्रो इंश्योरेंस) में शेयर निवेश के आरोप लगे थे। हालांकि उन्होंने शुरू में इन आरोपों का बचाव किया था, लेकिन निष्पक्ष जांच और 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) से बचने के लिए उन्होंने पद छोड़ना ही उचित समझा।
गुरुंग ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उनके लिए कोई भी राजनीतिक पद नैतिकता से ऊपर नहीं है। उनके बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
युवाओं की मांग: उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) सुशासन, ईमानदारी और जवाबदेही की मांग कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।
पारदर्शी जांच: उन्होंने इस्तीफा इसलिए दिया ताकि उनके पद पर रहते हुए जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो।
बलिदान का सम्मान: उन्होंने कहा कि यह सरकार 46 शहीदों के बलिदान पर बनी है, और उनके सम्मान की रक्षा के लिए नैतिकता ही एकमात्र उत्तर है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह (Balen Shah) के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह पखवाड़े भर में दूसरा बड़ा झटका है।
इससे पहले 9 अप्रैल 2026 को श्रम मंत्री दीपक कुमार साह को अनुशासनहीनता और पद के दुरुपयोग (अपनी पत्नी को सरकारी बोर्ड में नियुक्त करने) के आरोप में पद से हटा दिया गया था।
गृह मंत्री के इस्तीफे के बाद फिलहाल प्रधानमंत्री बालेन शाह ने गृह मंत्रालय का प्रभार अपने पास ही रखा है।
38 वर्षीय गुरुंग, जो पिछले साल के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों का एक प्रमुख चेहरा थे, ने नागरिकों और मीडिया से सच्चाई के मार्ग पर चलने की अपील की है। उन्होंने संकेत दिया कि जांच के दौरान कुछ बड़े नामों के आर्थिक हितों का खुलासा भी हो सकता है। यह घटनाक्रम नेपाल की राजनीति में जवाबदेही के एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां भारी जनादेश के बावजूद मंत्रियों को आरोपों के घेरे में आते ही पद छोड़ना पड़ रहा है।
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