Office Address

Address Display Here

Phone Number

+91-9876543210

Email Address

info@deshbandhu.co.in

नेपाल त्रासदी: जयशंकर ने काठमांडू व बीजिंग में भारतीय मिशनों के साथ राहत और बचाव कार्यों पर की चर्चा


नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को विदेश मंत्रालय (एमईए) के अधिकारियों और काठमांडू व बीजिंग स्थित दूतावासों के साथ बैठक की। इस बैठक में नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्यों पर चर्चा की गई।

नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को विदेश मंत्रालय (एमईए) के अधिकारियों और काठमांडू व बीजिंग स्थित दूतावासों के साथ बैठक की। इस बैठक में नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्यों पर चर्चा की गई।

बैठक के दौरान, विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने नेपाल भेजे जाने वाली राहत सामग्री के बारे में जानकारी दी। बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिसरी, एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल और अन्य अधिकारी मौजूद थे।

बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, "शुक्रवार को नेपाल में चल रहे राहत और बचाव कार्यों पर चर्चा हुई। काठमांडू और बीजिंग में हमारे दूतावासों ने भारतीय नागरिकों की स्थिति और उनकी सलामती के बारे में ताजा जानकारी दी। एमईए के संबंधित विभागों ने हमें नेपाल भेजे जाने वाले अतिरिक्त राहत सामग्री के बारे में बताया। हम इस मुद्दे को सबसे ज्‍यादा प्राथमिकता देते हैं।"

यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब नेपाल की भोटे कोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण 469 लोगों की मौत हो गई और 977 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

नेपाल आपदा पर प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए एमईए के प्रवक्ता जायसवाल ने कहा कि भारत बाढ़ के बाद बचाव और राहत कार्यों में नेपाल की मदद के लिए बेली ब्रिज भेजेगा। उन्होंने बताया कि भारत ने दो विमानों के जरिए नेपाल को 47.5 टन राहत सामग्री भेजी है।

उन्होंने कहा, "मानवीय सहायता लेकर दो विमान काठमांडू भेजे गए हैं। एक सी-130जे विमान कल (बुधवार) रात करीब 8.30 बजे 10 टन राहत सामग्री लेकर रवाना हुआ, जिसमें अस्थायी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, दवाएं आदि शामिल थीं। फिर गुरुवार सुबह एक सी-17 विमान 37.5 टन सामान लेकर रवाना हुआ, जिसमें 28.5 टन राहत सामग्री (जैसे टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, पानी निकालने वाले पंप, किचन सेट, जेनसेट), आठ टन दवाएं और एक टन खाद्य सामग्री शामिल थी।"

उन्‍होंने कहा, "कुल मिलाकर, हवाई मार्ग से दो बार में भारत ने नेपाल में चल रहे बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए 47.5 टन आपातकालीन सामान भेजा है। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि और मदद देने पर भी विचार किया जा रहा है। हम बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए बेली ब्रिज भी भेज रहे हैं।"

माना जा रहा है कि नेपाल और चीन के बीच बहने वाली नदी (भोटे कोशी नदी के ऊपरी हिस्से) में हिमस्खलन के कारण ये बाढ़ आई है। इस बाढ़ ने नदी के निचले इलाकों में भारी तबाही मचाई है, जिससे कई बस्तियां, सड़कें, पनबिजली परियोजनाएं और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं बह गई हैं।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, अलग-अलग जिलों से 469 शव बरामद किए गए हैं। सबसे ज्‍यादा 178 शव चितवन जिले से मिले हैं, इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 110 शव मिले हैं। इसी तरह, गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, तनहुन में 28, नवलपरासी वेस्ट में 27, धाडिंग में 23 और रसुवा में 12 शव बरामद किए गए हैं।

संपर्क से बाहर 977 लोगों में से 517 विदेशी नागरिक हैं। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार रात बताया कि भोटे कोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद 290 भारतीय अभी भी संपर्क से बाहर हैं। अमेरिका ने कहा कि नेपाल में बाढ़ से लगभग 90 अमेरिकी प्रभावित हो सकते हैं जबकि चीन ने कहा कि नेपाली इलाके में लगभग 100 चीनी नागरिक लापता हैं।

अथॉरिटी के अनुसार, संपर्क से बाहर वाले लोगों में विदेशों में रहने वाले 127 नेपाली भी शामिल हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, संपर्क से बाहर लोगों में नेपाल पुलिस के 28 जवान, नेपाल सेना के 45 जवान, आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13 जवान, कस्टम ऑफिस के 15 कर्मचारी और इमिग्रेशन ऑफिस के चार कर्मचारी शामिल हैं।

अथॉरिटी ने बताया कि इस आपदा में कम से कम 73 लोग घायल हुए हैं, जिनमें रसुवा में 43, धाडिंग में तीन और नुवाकोट में 27 लोग शामिल हैं।

--आईएएनएस

एएसएच/पीएम

Share:

Leave A Reviews

Related News