
नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच हालिया ट्रेड डील ने भारतीय निर्यातकों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने के फैसले से उन सेक्टरों को सबसे बड़ी राहत मिली है, जो पिछले कुछ महीनों से अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे थे.
इन सेक्टरों की होगी 'चांदी':
कपड़ा और कालीन (Textiles & Carpets): भारी टैक्स के डर से जो निर्यातक शिपमेंट रोकने वाले थे, वे अब अगले सीजन के लिए भारी ऑर्डर्स की उम्मीद कर रहे हैं.
लेदर (Leather): भारतीय चमड़ा उत्पादों के लिए अमेरिका एक बड़ा बाजार है. 18% टैरिफ के बाद अब यह सेक्टर ग्लोबल मार्केट में फिर से प्रतिस्पर्धी बन गया है.
जेम्स और ज्वेलरी (Gems & Jewelry): भारतीय गहनों की चमक अब और बढ़ेगी. अमेरिका ने चीन पर 34% टैरिफ बरकरार रखा है, जबकि भारत पर यह केवल 18% है. यह 16% का अंतर भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में पहली पसंद बना देगा.
बाजार का संतुलन: चुनौतियां और जीत
यद्यपि अधिकांश क्षेत्रों में उत्सव का माहौल है, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है:
मेटल और ऑटो पार्ट्स: ऑटो पार्ट्स और मेटल जैसे कुछ खास क्षेत्रों पर अभी भी सेक्टोरल टैरिफ प्रभावी रहेंगे, जिससे इन उद्योगों को पूरी राहत के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा.
इलेक्ट्रॉनिक्स का दबदबा: दिलचस्प बात यह है कि टैरिफ विवाद के बीच भी भारत का स्मार्टफोन निर्यात दोगुना होकर $16.7 बिलियन पर पहुंच गया है. फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टरों पर पहले भी ट्रंप के टैरिफ का असर कम ही देखा गया था.
रणनीतिक मजबूती: यूरोप और यूके का साथ
भारत ने भविष्य के जोखिमों को भांपते हुए अपनी निर्यात रणनीति में विविधता लाई है. यूके (UK) और यूरोपीय संघ (EU) के साथ किए गए हालिया व्यापार समझौतों ने भारत के लिए बैकअप बाजार तैयार कर दिया है, ताकि भविष्य में अमेरिकी नीतियों में बदलाव से अर्थव्यवस्था को झटका न लगे.
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