
अयोध्या। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में आज नव संवत्सर के अवसर पर एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन संपन्न हुआ। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राम जन्मभूमि मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए और मंदिर के दूसरे तल पर विधि-विधान के साथ 'श्रीराम यंत्र' और 'श्रीराम नाम मंदिर' की स्थापना की। इस गौरवशाली क्षण के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उपस्थित रहे।
श्रीराम यंत्र की स्थापना का यह महान अनुष्ठान आज सुबह 9 बजे से शुरू हुआ। काशी के प्रख्यात विद्वान पद्मभूषण पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ के नेतृत्व में दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के 51 वैदिक आचार्यों ने मंत्रोच्चार के साथ इस प्रक्रिया को पूर्ण किया। ट्रस्ट के अनुसार, यह यंत्र केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं है, बल्कि यह श्रीराम की शक्ति, मर्यादा और राष्ट्र चेतना का आध्यात्मिक पुंज है, जो मंदिर परिसर को नई ऊर्जा से भर देगा।

मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार किसी अति-विशिष्ट (VVIP) कार्यक्रम के दौरान एक सराहनीय मिसाल पेश की। राष्ट्रपति की मौजूदगी और इतने बड़े आयोजन के बावजूद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की प्रक्रिया को सुचारु रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था को इस तरह से चाक-चौबंद किया गया था कि अतिथियों के आवागमन और पार्किंग के बीच आम भक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
दर्शन और पूजन के पश्चात, राष्ट्रपति ने मंदिर निर्माण में अपना पसीना बहाने वाले करीब 400 निर्माण श्रमिकों (श्रमजीवियों) को सम्मानित भी किया। राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बताया कि दूसरे तल पर इस यंत्र की स्थापना से मंदिर की संरचनात्मक और आध्यात्मिक पूर्णता की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाया गया है। राष्ट्रपति की उपस्थिति ने इस धार्मिक आयोजन को राष्ट्रीय गौरव और एकता के पर्व में बदल दिया।
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