
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने अपने प्रशासनिक कामकाज को हाई-स्पीड रफ्तार देने और भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टालरेंस' (Zero Tolerance) की नीति को अमलीजामा पहनाने के लिए एक बेहद बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। रेल मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले रेलवे बोर्ड ने सालों पुराने प्रशासनिक नियमों में बड़ा संशोधन करते हुए एक नया आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किया है। रेलवे बोर्ड का नया आदेश लागू होने के बाद अब दागी, लापरवाह या दोषी पाए गए रेल कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने की मंजूरी देने वाले सरकारी दस्तावेजों को प्रमाणित (Certify) करना बेहद आसान हो जाएगा। इस ऐतिहासिक कदम से रेलवे के भीतर अनुशासनहीनता के मामलों में होने वाली ढिलाई पर पूरी तरह लगाम लगेगी।
आमतौर पर देखा जाता है कि जब भी किसी रेल कर्मी या क्लास-वन अफसर पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगता है या कोई घोटाला सामने आता है, तो जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने के लिए रेलवे बोर्ड की अंतिम मंजूरी (Sanction for Prosecution) की दरकार होती थी।
पहले इस मंजूरी के बाद आधिकारिक दस्तावेजों को तैयार करने, उन पर उच्च स्तर के हस्ताक्षर लेने और उन्हें सीबीआई (CBI) या सतर्कता विभाग जैसी संबंधित जांच एजेंसियों तक भेजने की प्रक्रिया काफी पेचीदा और वक्त लेने वाली होती थी। उच्च स्तर पर फाइलों के लंबे समय तक दबे रहने के कारण दोषियों को बचने या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने का मौका मिल जाता था। अब रेलवे बोर्ड ने इस कागजी पेंच को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
रेलवे बोर्ड का नया आदेश के तहत अब फाइलों को बार-बार ऊपर भेजने की जरूरत नहीं होगी। बोर्ड ने प्रशासनिक विकेंद्रीकरण करते हुए जवाबदेही तय कर दी है:
अधिकृत अधिकारी: अब रेलवे बोर्ड द्वारा मंजूर किए गए मुकदमों के आदेशों को प्रमाणित करने का अधिकार संयुक्त सचिव (Joint Secretary), निदेशक (Director), उप सचिव (Deputy Secretary) और अवर सचिव (Under Secretary) स्तर के अधिकारियों को सौंप दिया गया है।
त्वरित हस्ताक्षर: जैसे ही बोर्ड किसी दोषी कर्मचारी पर एक्शन लेने का मुख्य नीतिगत फैसला लेगा, वैसे ही ये अधिकृत अधिकारी तुरंत उस आदेश पर दस्तखत कर उसे आगे बढ़ा सकेंगे।
स्पष्ट निर्देश: इन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे दस्तावेजों पर बकायदा यह उल्लेख करेंगे कि यह आदेश रेलवे बोर्ड की ओर से और उसके नाम पर ही जारी किया जा रहा है।
"इस प्रशासनिक और कानूनी बदलाव का सीधा असर पूरे देश के रेल तंत्र पर पड़ेगा। रेलवे बोर्ड के इस कदम से न सिर्फ दिल्ली स्थित मुख्यालय में फाइलों का बोझ कम होगा, बल्कि देश के सभी 17 से अधिक क्षेत्रीय रेलवे जोनों और मंडलों (Divisions) में भी यह कड़ा संदेश जाएगा कि लापरवाही या भ्रष्टाचार पर अब त्वरित और ऑन-स्पॉट सख्त कार्रवाई होगी।"
इस नए बदलाव से रेलवे के सतर्कता विभाग (Vigilance) और लीगल विंग का कामकाज भी काफी सुव्यवस्थित और आधुनिक हो जाएगा। सीधे शब्दों में कहें तो रेलवे ने अपने प्रशासनिक ढांचे को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में यह एक अत्यंत प्रभावी कदम उठाया है।
Leave A Reviews