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निशा भगत मौत मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग सख्त, झारखंड प्रशासन से मांगी रिपोर्ट


नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्‍ल्‍यू) ने झारखंड के रांची में आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत की मौत से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। इस संबंध में एक अधिकारी ने शनिवार को जानकारी दी।

नई दिल्ली, 7 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्‍ल्‍यू) ने झारखंड के रांची में आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत की मौत से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। इस संबंध में एक अधिकारी ने शनिवार को जानकारी दी।

रिपोर्टों के अनुसार, एक फेसबुक लाइव सेशन के दौरान उन्होंने ऑनलाइन ट्रोलिंग, उत्पीड़न और स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस के खिलाफ अपनी शिकायतों को लेकर परेशानी जताई थी। एनसीडब्‍ल्‍यू अधिकारी ने एक बयान में कहा कि लाइव सेशन के दौरान उन्होंने पिठोरिया पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी से भी संपर्क किया था और उन्हें अपनी परेशानियों के बारे में बताया था, साथ ही यह भी कहा था कि उनके मन में अपनी जान देने का विचार आ रहा है।

आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने झारखंड के अधिकारियों को पत्र लिखकर इस मामले की निष्पक्ष, गहन और समयबद्ध जांच कराने, पुलिस की प्रतिक्रिया और की गई कार्रवाई की समीक्षा करने, पहले दर्ज कराई गई शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जांच करने और फेसबुक लाइव रिकॉर्डिंग, कॉल रिकॉर्ड तथा अन्य डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाने को कहा है।

आयोग ने यह भी कहा है कि अगर पुलिसकर्मियों की ओर से कोई लापरवाही या कर्तव्य में कोताही पाई जाती है तो उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए और मृतका के परिवार को आवश्यक सहायता प्रदान की जानी चाहिए।

बयान में कहा गया है कि आयोग ने 7 दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है।

विजया रहाटकर ने कहा कि किसी भी महिला की पीड़ा या मदद की पुकार अनसुनी नहीं रहनी चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए संवेदनशीलता, समय पर कार्रवाई और जवाबदेही बहुत जरूरी है।

इससे पहले आयोग की अध्यक्ष ने बलात्कार पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए एनसीडब्‍ल्‍यू द्वारा शुरू किए गए एक नए सपोर्ट ग्रुप के बारे में जानकारी दी।

सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "राष्ट्रीय महिला आयोग ने एक और संवेदनशील पहल शुरू की है। इसका नाम है 'साथी'। यह सपोर्ट ग्रुप दुष्‍कर्म की शिकार महिलाओं और उनके परिवारों को भावनात्मक और मानसिक संबल प्रदान करने का एक प्रयास है।"

रहाटकर ने कहा, "हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ितों और उनके परिजनों को कठिन समय में ऐसा सहयोग मिले, जहां वे अपने मन की बात कह सकें। अपना दर्द साझा कर सकें और जीवन में फिर से आगे बढ़ने का साहस जुटा सकें।" आने वाले समय में हम इसी तरह के कई और सपोर्ट ग्रुप शुरू करने का प्रयास करेंगे। इस मौके पर पुणे से शुभम कुलकर्णी विशेष रूप से मौजूद थे।

उन्‍होंने कहा कि एक आदतन अपराधी ने उनकी तीन साल की मासूम बेटी के साथ बलात्कार किया और बेरहमी से उसकी हत्या कर दी। इस दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे समाज को अंदर तक झकझोर कर रख दिया था। पुणे ग्रामीण पुलिस ने बहुत तत्परता से जांच पूरी की और महज 59 दिनों के भीतर इस जघन्य अपराध के दोषी को मौत की सजा दिलाई। इस असहनीय दुख को झेलने के बावजूद, कुलकर्णी दंपति ने अपनी दिवंगत बेटी की याद में एक फाउंडेशन की स्थापना की है।

उन्‍होंने कहा, “इसके जरिए, वे पीड़ितों और उनके परिवारों की मदद करने का सराहनीय काम कर रहे हैं। उनकी यह निरंतर कोशिश कि किसी और परिवार को उस पीड़ा से न गुजरना पड़े, जिससे उनके बच्चे के साथ हुई त्रासदी के बाद उन्हें गुजरना पड़ा, बेहद प्रेरणादायक है। उनके अनुभवों और आज भी उनके दिलों में बसे गहरे दर्द के बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ।”

रहाटकर ने लिखा, “साथ ही उस दर्द को समाज के लिए सकारात्मक प्रयासों में बदलने का उनका संकल्प दिल को छू लेने वाला है। इस मौके पर मैंने ‘साथी’ की अवधारणा और इसके पीछे की भावना के बारे में बताया।”

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी

Date & Time : 2026-11-07 22:35:02

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